नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। मुर्गी का मांस पसंद करनेवालों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है कि देश के कई इलाकों में चिकन की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई और उम्मीद है कि यह 25-30 फीसदी तक बढ़ सकती है और इसके उपभोग में 35 से 40 फीसदी की वृद्धि हो सकी है। गोमांस पर लगे प्रतिबंध को लेकर उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा किए गए विश्लेषण में यह जानकारी मिली है।
एसोचैम के आर्थिक शोध ब्यूरो के विश्लेषण से पता चला है, “साल 2014 के मई से लेकर साल 2017 के मार्च तक पोल्ट्री थोक मूल्य सूचकांक में 22 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि गोमांस और भैंस के मांस की कीमतें तीन फीसदी तक घटी हैं।”
हालांकि पोल्ट्री मीट, ज्यादातर चिकन का उत्पादन 10-12 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रहा है, वहीं, पिछले कुछ सालों से इनका उपभोग 15-18 फीसदी दर से बढ़ा है।
एसोचैम के एक प्रवक्ता ने कहा, “गोमांस पर प्रतिबंध और उससे जुड़े विवाद निश्चित रूप से पोल्ट्री फार्म के लिए फायदा देनेवाला रहा है, खासकर आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में।”
विश्लेषण में कहा गया है कि ज्यादातर उपयोगकर्ताओं ने कहा कि गर्मी के दिनों में आमतौर पर चिकन की मांग और कीमतों में गिरावट होती है, लेकिन इस साल गोमांस पर लगे प्रतिबंध के कारण ऐसा नहीं हुआ है।
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