पणजी, 12 मार्च (आईएएनएस)। गोवा के पर्यावरण एवं वन मंत्री राजेंद्र अरलेकर ने कहा कि यह कभी नहीं बर्दाश्त किया जाएगा कि अभिव्यक्ति की आजादी की दुहाई देकर कन्हैया कुमार जैसे लोग कुछ भी कह सकते हैं।
उन्होंने गोवा में नेहरू युवा केंद्र के तत्वावधान में आयोजित समारोह में चयनित युवाओं के समूह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
वन मंत्री ने कहा, “ये सारे विचार साम्यवाद से आते हैं। इस मामले में बाबासाहब अम्बेडकर के विचारों को पढ़ना ज्यादा महत्वपूर्ण है। अब आत्मनिरीक्षण और यह देखने का समय आ गया है कि साम्यवाद हमें कहां ले जा रहा है। क्या साम्यवाद हमलोगों को सही रास्ते पर ले जा रहा है?”
उल्लेखनीय है कि 12 फरवरी को जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी और जमानत पर रिहा होने के बाद से देश में देशद्रोह कानून और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस जारी है।
उन्होंने कहा, “इस तरह की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या तात्पर्य है? क्या इसका मलब यह है कि आप किसी को कुछ भी कह सकते हैं? क्या दूसरे लोगों के अधिकार सुरक्षित नहीं हैं? जबकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संबंध अन्य लोगों के अधिकारों से भी है।”
अरलेकर ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय युवाओं का एक वर्ग अन्य चीजों को राष्ट्र के आगे रखता है और आजादी का गीत गुनगुनाता है।
उन्होंने कहा, “अगर कोई इस तरह की आजादी की बात करता है तो इस देश की उम्र ज्यादा नहीं है। हम इस देश की मिट्टी और देश को क्या देना चाहते हैं वह एक बड़ा पहलू है। आज के युवाओं के गीतों और विचारों में राष्ट्र पहले होना चाहिए। अन्य चीजों का स्थान उसके बाद ही है।”
उन्होंने आगे कहा, “जब आप इस देश के संदर्भ में बात करते हैं तो आप आजादी की मांग नहीं कर सकते और इसके लिए आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई देकर मुक्त भी नहीं हो सकते हैं। आजादी क्या है? आप किससे आजादी चाहते हैं? क्या आप हिन्दुस्तान से आजादी चाहते हैं?”
कन्हैया ने अपनी रिहाई के बाद छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था किवह हिन्दुस्तान ‘से’ आजादी नहीं, हिन्दुस्तान ‘में’ आजादी चाहते हैं। भूख, गरीबी, बेकारी, भ्रष्टाचार से आजादी चाहते हैं। आरएसएस और भाजपा की नीतियों के खिलाफ बोलने के कारण कन्हैया व उनके साथियों को प्रताड़ित किए जाने का विरोध करते हुए वामपंथी पार्टियां व कांग्रेस ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ का मुद्दा उठा रही हैं और आरएसएस के हिमायती लोग इस बात को घुमाकर अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे हैं।
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