नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। घटते सेब उत्पादन से चिंतित केंद्र सरकार शीत भंडारों की संख्या बढ़ाने के लिए कदम उठाने जा रही है। खास तौर से जम्मू एवं कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भंडारों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। घटते सेब उत्पादन से चिंतित केंद्र सरकार शीत भंडारों की संख्या बढ़ाने के लिए कदम उठाने जा रही है। खास तौर से जम्मू एवं कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में भंडारों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने आईएएनएस से कहा कि सरकार जल्द ही प्रस्तावित कदमों की घोषणा कर सकती है।
मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, “जम्मू एवं कश्मीर में ही नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी सेब उत्पादन घट रहा है।”
सेब का सबसे अच्छा भंडारण आधुनिक भंडार में किया जा सकता है, जिसे कंट्रोल्ड एटमॉस्फेयर यूनिट कहा जाता है। इसमें ऑक्सीजन, कार्बनडाईऑक्साइड और नाइट्रोजन की मात्रा तथा तापमान और आद्र्रता को नियंत्रित किया जाता है।
कश्मीर के सेब उत्पादकों का कहना है कि ऐसे कदम उठाने जरूरी हैं, क्योंकि सेब टूटने के तुरंत बाद घाटी से विशाल मात्रा में उनकी बिक्री होती है और इसे सालभर बेचने के लिए संरक्षित नहीं किया जाता है।
दक्षिण कश्मीर के सोपियां जिले के एक उत्पादक मुजफ्फर मंटू ने आईएएनएस से कहा, “शीत भंडार से सेब अधिक समय तक टिक सकते हैं और कीमतों का भी नियंत्रण होता है।”
इन राज्यों में कुछ शीत भंडार खुले हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर फल उत्पादन को देखते हुए ये नाकाफी हैं।
ऐसी स्थिति में काफी सेब या तो बर्बाद हो जाते हैं या सस्ते भाव बेचने पड़ते हैं, क्योंकि ये अधिक समय तक टिक नहीं सकते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इसके बावजूद सेब उत्पादन क्षेत्र पिछले कुछ साल में जम्मू एवं कश्मीर और हिमाचल प्रदेश दोनों ही राज्यों में बढ़ा है।
उत्पादन हालांकि घटा है। इस गिरावट का एक कारण अधिकारियों ने यह बताया कि अनियोजित शहरीकरण के कारण सेब के उपजाऊ बागानों का एक बड़ा हिस्सा आवासीय क्षेत्रों में परिणत हो गया है।
दक्षिण कश्मीर का प्रमुख सेब उत्पादक जिला अनंतनाग और उत्तर कश्मीर के सोपोर तथा आसपास के क्षेत्रों में यह बदलाव काफी देखा जा सकता है।
देश में सेब उत्पादन मुख्यत: जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में होता है।
देश में 2014-15 में सेब उत्पादन घटकर 18.85 लाख टन रहा, जो एक साल पहले करीब 25 लाख टन था।
अधिकारियों ने कहा कि मंत्रालय के बागवानी प्रभाग को स्थिति में सुधार लाने के लिए सुझाव देने का निर्देश दिया गया है।
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