विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति के रूप में एडरेगन की पहली चीन यात्रा सफल रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि उनकी इस यात्रा से दोनों देशों को कई क्षेत्रों में मिलकर काम करने में मदद मिलेगी, जिससे वे अधिक निकट आएंगे। इनमें आतंकवाद से लड़ाई, आर्थिक सहयोग के विस्तार और विकसित हो रहे विश्व के हितों की रक्षा करना शामिल हैं।
एडरेगन के साथ बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने दोनों देशों से आपसी विश्वास को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि चीन और तुर्की कठिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
एडरेगन ने भरोसा दिलाया है कि उनकी सरकार ऐसी किसी भी गतिविधि के खिलाफ है, जिससे तुर्की के भीतर चीन की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचे।
तुर्की के नेता ने यह भी प्रतिबद्धता जताई कि उनका देश ‘वन चाइना नीति’ का पालन करना जारी रखेगा।
उन्होंने कहा कि उनका देश ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक आंदोलन द्वारा चीन के खिलाफ सभी आतंकवादी हमलों का विरोध करता है और इस मोर्चे पर वह चीन के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है।
इस दौरान एडरेगन ने चीन के साथ तुर्की के रणनीति सहयोग संबंधों को बढ़ाने की भी इच्छा जताई। तुर्की कई परियोजनाओं पर चीन के साथ काम करना चाहता है।
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