‘चीन में किशोरावस्था से लोग करते हैं योग’ (फोटो सहित)

भोपाल/ललितपुर, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश और दुनिया में सूखाग्रस्त इलाके के तौर पर पहचाने जाने वाले बुंदेलखंड के ललितपुर जिले के गरीब परिवार में जन्मे और कंप्यूटर में पीएचडी करने के बाद चीन में ‘योग गुरु’ के तौर पर पहचान बना चुके सोहन सिंह का कहना है कि चीन में लोग सेहत के प्रति ज्यादा सजग है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि वहां किशोरावस्था और युवावस्था से ही लोग योग करने लगते हैं। योग ही उनकी तंदुरुस्त सेहत का राज है।

भोपाल/ललितपुर, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश और दुनिया में सूखाग्रस्त इलाके के तौर पर पहचाने जाने वाले बुंदेलखंड के ललितपुर जिले के गरीब परिवार में जन्मे और कंप्यूटर में पीएचडी करने के बाद चीन में ‘योग गुरु’ के तौर पर पहचान बना चुके सोहन सिंह का कहना है कि चीन में लोग सेहत के प्रति ज्यादा सजग है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि वहां किशोरावस्था और युवावस्था से ही लोग योग करने लगते हैं। योग ही उनकी तंदुरुस्त सेहत का राज है।

भारत प्रवास पर आए सोहन सिंह ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, “भारत में लोग योग मजबूरी में करते हैं। वे उम्र बढ़ने और बीमारी होने पर योग की तरफ बढ़ते हैं, जबकि चीन में लोग तब योग करते हैं, जब वे पूरी तरह स्वस्थ्य होते हैं। यही कारण है कि वहां योग करने वालों में किशोर और युवाओं की संख्या ज्यादा है। चीनी लोगों की सेहत का राज ही योग है।”

एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि “सिर्फ कपाल भाथी, प्राणायाम, भ्रमरी ही योग नहीं है, योग की ये क्रियाएं हैं, योग तो विस्तृत हैं, विशाल है, विज्ञान है, जो इंसान के जीवन को बदलने का काम करता है। हमारे देश में क्रियाओं को ही योग के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। हमारे देश में लोग टीवी पर खेल की तरह योग को देखते हैं, मगर चीन में लोग योग करते हैं, योग देखने नहीं करने की विधा है।”

योग की खूबियों का जिक्र करते हुए योग गुरु ने कहा, “योग जीवन को जीने की कला है, भारत में लोग योग तब करते हैं, जब बीमार हो जाते हैं, मगर चीन में लोग योग तब करते हैं, जब वे जवान होते हैं, स्वस्थ्य होते हैं। 15 साल की उम्र में बच्चे को योग कराने लगें तो वह वही बन जाएगा, जो वह बनना चाहता है, यह क्षमता है योग में। समाज और देश के प्रति इतना सम्मान पैदा हो जाएगा कि वह अच्छा नागरिक, अच्छा बेटा और अच्छा पति-पत्नी हो जाएगा।”

अपनी भारत यात्रा के बारे में उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को वह योग से जोड़ना चाहते हैं। चूंकि युवाओं को लगता है कि योग बोरिंग विषय है, इसलिए उन्होंने ग्वालियर की आईटीएम यूनिवर्सिटी के साथ समझौता किया है। आगे चलकर वह देश के अन्य हिस्सों में भी युवाओं को जोड़ने के प्रयास जारी रखेंगे।

अपने जीवन के अनुभव बयां करते हुए सोहन गुरु ने कहा कि उनके लिए पढ़ाई और पेट भरने का इंतजाम एक बड़ी चुनौती थी, मगर योग ने उनके जीवन को बदल दिया। उन्होंने कंप्यूटर की पढ़ाई की है, मगर योग उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा है। वह ललितपुर के बरखेड़ा गांव के गरीब परिवार की समस्याओं से गुजरते हुए वर्तमान में चीन में सोहन योगा संस्थान के प्रमुख हैं। वह नौ क्लब चल रहे हैं, हजारों लोगों को योग का पाठ पढ़ा रहे हैं। यह सब योग विधा को जीवन में उतारने से संभव हुआ है।

कंप्यूटर में डॉक्टरेट करने के लिए सोहन चीन पहुंचे, जहां उन्होंने नौकरी के साथ योग की कक्षाएं लेना शुरू किया। समय के साथ हालात बदलते गए और आज उनकी जिंदगी के लिए योग ही सबकुछ है।

वह कहते हैं कि योग से इंसान की जिंदगी को बदला जा सकता है, चित्त तो स्थिर होता ही है, व्यक्ति स्वस्थ्य भी रहता है। वह चीन के अलावा भारत में भी लोगों को प्रशिक्षण देते हैं। उनके लिए योग प्राथमिकता है, पैसा मायने नहीं रखता।

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