दीपक ने कहा कि इस मौके पर हमेशा वह अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए कहीं न कहीं मोर्चे पर तैनात रहते हैं, लेकिन आज उनकी यह 14 वर्षों से खाली कलाई फिर से सज गई है। उन्हें जगदलपुर के करणपुर स्थित सीआरपीएफ204 कोबरा बटालियन में जगदलपुर की महिलाओं ने राखी बांधी।
दीपक की आंखें इस दौरान नम हो गई, जुबां लड़खड़ाने लगी। दीपक ने कहा, “अपने न हों तो क्या हुआ, ये अपने हैं, इनका ख्याल रखेंगे। हमें इस बात का फक्र है कि हमारा परिवार नजदीक न होते हुए भी राखी बांधने हमारी बहनें आई हैं।”
दीपक ने कहा, “बहनों से राखी बंधाने के बाद ऐसा महसूस हुआ कि पूरा देश ही हमारा परिवार है और इन बहनों के आशीर्वाद से हमारी उम्र और लंबी होगी। नक्सली हमारा बाल भी बांका नहीं कर सकते।”
सीआरपीएफ कोबरा बटालियन के कमांडेड प्रेम सिंह ने कहा, “ये बहनें हमें यहां राखी बांधने आई हैं। इससे हमें इस बात का एहसास हुआ कि हम यहां अकेले नहीं हैं। भले ही हम अपने परिवार से दूर हैं, लेकिन यहां भी हमारी फिक्र करने वाली बहनें और परिवार मौजूद हैं।”
उन्होंने बताया कि फर्ज निभाने के लिए पिछले 12 साल से राखी का त्योहार नहीं मना पाए हैं। इस बात का उन्हें गम तो है, लेकिन देश की रक्षा करना उनका पहला कर्तव्य है।
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