भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ विधायक ने उक्त कृत्य की निंदा करते हुए कहा कि सदन का नेतृत्व स्पीकर करते हैं और ये आसंदी सबसे ऊपर है। आक्रोश और आवेश होता है, लेकिन जानबूझकर किया जाए कि कौन क्या कर लेगा, यह गलत है।
प्रेमप्रकाश पांडेय ने कहा, “संसदीय लोकतंत्र में सदन का महत्वपूर्ण स्थान होता है। असहमति से सहमति तक जाना पहला प्रयास होता है। तीनों विधायकों का कृत्य व आचरण स्वयं को खराब करता है। ये निंदनीय है, ऐसा छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज तक नहीं हुआ।”
नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव ने निंदा करते हुए कहा, “संसदीय कार्यमंत्री के प्रस्ताव से मैं सहमत हूं। हमने अनेक सदनों में मारपीट, खींचतान, माइक फेंकने जैसा असंसदीय आचरण देखा और सुना, लेकिन छत्तीसगढ़ विधानसभा में यह पहली घटना होगी।”
उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ विधानसभा की अपनी व्यवस्था है। 2001 में गठन के बाद सर्वसम्मत्ति से व्यवस्थाएं बनाई गई और उसका सभी को पालन करना चाहिए।”
कांग्रेस सदस्य भूपेश बघेल ने भी निंदा करते हुए कहा कि सदन कभी अपवित्र नहीं हो सकता। पवित्र को पवित्र करने की जो हरकत कल हुई वह निंदनीय है। उन्होंने यहां तक भी कह दिया कि गंगाजल का उपयोग हिंदू धर्म में होता है, जोगी ने कहीं धर्म परिवर्तन तो नहीं कर लिया।
संसदीय कार्यमंत्री अजय चंद्राकर ने कहा, “गर्भगृह में प्रवेश करने पर स्वयं निलंबित हो जाते हैं। विरोध करने का तरीका गलत था। ये कृत्य निंदनीय है। सदन में नौटंकी की कोई जगह नहीं है।”
अमित जोगी ने इस पर कहा, “मुझ पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप लगा, जो गलत है। मैं सम्मान में खड़ा था। गंगाजल सब पाप को समाप्त कर सकता है।”
जोगी के गोल-मोल उत्तरों पर स्पीकर गौरीशंकर अग्रवाल ने उन्हें कहा, “ये आरोप नहीं प्रत्यक्ष कृत्य था, इस पर कुछ कहना चाहते हैं तो कहें।” इस पर जोगी ने स्टोरी के माध्यम से शराब की बात को बीच में लाते हुए गलत प्रभाव बताया। अमित जोगी अपनी बातों के बीच बोले, ” मेरे किसी भी आचरण से सदस्यों के मन को ठेस पहुंची हो तो मुझे खेद है, लेकिन मैंने शायद कुछ गलत नहीं किया।”
भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा ने कहा कि खेद वक्तव्य एक तरफ दे रहे हैं और दूसरी तरफ कह रहे कि मैंने सही किया।
स्पीकर ने सबका पक्ष सुनकर प्रस्ताव सदन के समक्ष रखा। सभी ने हां में जवाब दिया और स्पीकर ने सदन में निंदा प्रस्ताव पारित होने की घोषणा की, जिसके बाद विधायक अमित जोगी, आर.के.राय और सियाराम कौशिक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में प्रवेश किए और स्वयं निलंबित हो गए।
तीनों विधायक सात मार्च तक सदन की कार्यवाही से निलंबित रहेंगे। इस दौरान विधानसभा की कार्यवाही 13.44 बजे 10 मिनट के लिए स्थगित की गई।
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