छग : नोट बदलने की ‘जुगाड़’ लगाते रहे लोग, बाजार रहा सूना

बड़े नोटों के बंद होने और चिल्हर की किल्लत ने आम लोगों के साथ ही व्यापारियों को भी बेबस कर दिया। व्यापारी लोगों से सामान खरीदी के पहले ही तस्दीक कर रहे हैं कि उनके पास बड़े नोट तो नहीं हैं? व्यापारिक सन्नाटों और बैंकों के बंद रहने के बीच सिर्फ एक ही चर्चा नोटों के बदलने को लेकर होती रही।

वहीं दूसरी ओर रायपुर कलेक्टर ओ.पी. चौधरी और पुलिस अधीक्षक डॉ. संजीव शुक्ला ने आज रेडक्रॉस भवन में बैठक लेकर स्पष्ट किया कि इस फैसले को लेकर डरने या चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोगों से कहा कि उनके पास 50 दिन का समय है। वे 1000 या 500 के पुराने नोट खाते में डाल कर फिर अपनी जरूरत के अनुसार निकाल सकते हैं। उन्होंने बताया कि तत्काल जरूरत को देखते हुए किसी भी बैंक या डाकघर से पहचान पत्र दिखाकर नोट 10 नवंबर से 30 दिसंबर तक बदले जा सकेंगे।

राजधानी के कई दुकानों और होटलों में सुबह से बड़े नोटों स्वीकार नहीं किए जाने को लेकर पोस्टर चिपका दिए गए हैं। लोगों से आग्रह किया जा रहा है कि वे चिल्लर लेकर ही आएं। 1000 और 500 के नोट स्वीकार्य नहीं हैं। वहीं छोटे-छोटे फुटकर व्यवासियों और किराना वाले भी ये नोट लेने में हिचकिचा रहे हैं। साथ ही राजधानी के कई कॉलेजों में फीस लेने को लेकर प्रबंधन और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक होती रही।

बड़े नोट बंद किए जाने के फैसले से आज दवा दुकानों और पेट्रोल पंपों में खड़े लोगों की बेबसी साफ झलक रही थी। कहीं-कहीं तो पेट्रोल पंप में विवाद की स्थिति भी बन गई, तो कहीं 500 के नोट के बदले चिल्लर न देकर सीधे 500 के पेट्रोल ही डाले गए। वहीं दवा दुकानों में भी ये नोट स्वीकार नहीं किए गए, जिससे मरीजों के परिजन परेशान होते रहे।

बड़े नोटों के बंद होने का असर यहां तक रहा कि लोग उधारी का पैसा लेने से भी इंकार कर रहे हैं। उनका तर्क है कि एक-दो बाद ही दे देना।

राजधानी से निकलने वाली कई यात्री बसें भी आज खाली-खाली गंतव्य के लिए रवाना हुई। बड़े नोट नहीं लिए जाने और चिल्लर नहीं होने से कईयों को अपनी यात्रा तक रद्द करनी पड़ी। छत्तीसगढ़ मिनी बस महासंघ के अध्यक्ष हाजी शफीक का कहना है कि प्रदेश में लगभग 8 हजार निजी बसें संचालित हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए बस स्टैंड में नोट बदलने काउंटर खोलना था।

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