गौरतलब है कि गरियाबंद के छुरा में 23 जनवरी 2011 को पत्रकार उमेश राजपूत की अज्ञात हमलावरों ने घर के सामने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया जाता है कि मौके पर उमेश राजपूत के घर में शिव वैष्णव मौजूद था। पुलिस शिव वैष्णव को आरोपी और गवाह मानकर चल रही थी। शिव वैष्णव को उमेश का करीबी दोस्त माना जाता था, जिससे पुलिस की जांच की सुई शिव वैष्णव पर अटकी थी।
इस मामले में लगातार सीबीआई जांच की मांग की जाती रही थी, जिसके चलते सीबीआई को जांच का जिम्मा सौंपा गया था। घटना के पांच साल बाद सीबीआई शिव वैष्णव और उसके बेटे विकास को पूछताछ के लिए ले गई थी। 27 सितंबर को हिरासत में लिए गए शिव वैष्णव को 29 सितंबर को फांसी पर लटका पाया गया।
आनन-फानन में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार को अंबेडकर अस्पताल में शिव वैष्णव ने दम तोड़ दिया। शिव वैष्णव की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। मृतक की पत्नी और परिजनों ने सीबीआई के खिलाफ नारेबाजी की और शिव वैष्णव की मौत की जांच कराए जाने की मांग की है। परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया है।
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