इस घटना से आक्रोशित लोगों ने तीन घंटे तक चक्काजाम किया। मौके पर पहुंचे कलेक्टर सौरभ कुमार ने लोगों को समझा बुझाकर मामले को शांत कराया और बच्चे के इलाज में लापरवाही बरतने वाले पांच डॉक्टरों और बीएमओ को निलंबित करने के निर्देश दिए।
जानकारी पुलिस अधीक्षक कमलोचन कश्यप ने दी। उन्होंने बताया कि दरअसल सोमवार को सुबह 8 बजे बस स्टैंड पर अंशु गुप्ता अपनी मां के साथ बस स्टैंड पर सात साल की बच्ची को स्कूल छोड़ने आए थे।
मां जब बच्ची को बस में बैठा रही थी, तभी अंशु बस के सामने चला गया। बस के ड्राइवर ने जैसे ही बस आगे बढ़ाया, बस अंशु पर चढ़ गई, जिससे वहां चीख-पुकार मच गई। चालक ने बस को पीछे किया। लोगों ने गंभीर रूप से घायल अंशु को उठाया और उसको जिला अस्पताल ले गए। जिला अस्पताल में तीन डॉक्टरों की ड्यूटी थी, मगर दुर्भाग्यवश तीनों ही नदारद थे।
इसके बाद फोन कर के सक्षम से एक चिकित्सक को बुलवाया गया। उसने अंशु का प्रथमोपचार किया और उसकी हालत को देखते हुए उसे जगदलपुर ले जाने की सलाह दी। परिजन तत्काल बच्चे को लेकर जगदलपुर रवाना हो गए, मगर रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर सौरभ कुमार के निर्देश पर एसडीएम ने पांच डॉक्टरों व बीएमओ को निलंबित कर दिया है। बताया जा रहा है कि इनमें सक्षम के उस डॉक्टर को भी निलंबित कर दिया गया, जिसने बच्चे का प्रथमोपचार कर उसे लेकर जगदलपुर जा रहा था।
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