मुख्य न्यायाधीश टी.बी.एन. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति शरद गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि सरकार द्वारा की गई संसदीय सचिवों की नियुक्ति बरकरार रहेगी, लेकिन ये मंत्री के रूप में कार्य नहीं कर सकते।
संसदीय सचिवों की नियुक्ति के खिलाफ याचिकाएं कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर और आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे ने दायर की थी। इस मामले में अंतिम सुनवाई 16 मार्च को हुई थी।
संसदीय सचिवों के मामले में हाईकोर्ट का फैसला आने पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा, “ये तो होना ही था। हम पहले से कहते रहे हैं कि संसदीय सचिवों की नियुक्ति कोई गलत काम नहीं है। हमारी उम्मीदों के अनुरूप ही फैसला आया है। अदालत ने न्याय किया है।”
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार ने संविधान के विपरीत 11 संसदीय सचिवों की नियुक्ति की है। उन्हें मंत्री की तरह सुविधाएं दे रही है। अगर इन 11 संसदीय सचिवों की नियुक्ति रद्द होती तो सरकार गिर जाती। अदालत के फैसले से न्याय नहीं हुआ है।
फैसला आने पर संसदीय सचिव लाभचंद बाफना ने कहा, “न्यायपालिका पर हमें पूरा विश्वास है। हम नि:स्वार्थ भाव से जनता की सेवा करते हैं।”
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