अदालत ने यह भी कहा कि कानून में रिकार्ड आवाज को साक्ष्य मानने का कोई प्रावधान नहीं है।
जिला एवं सत्र न्यायालय के लोक अभियोजक ताम्रकार ने बताया कि पिछली सुनवाई के दौरान न्यायाधीश एन.डी. तिगाला की अदालत में घोटाले संबंधी रिकार्ड आवाज को बतौर साक्ष्य पेश किया गया, जिसमें अदालत ने कानूनी प्रावधान नहीं होने और आवाज को नकली बनाकर प्रस्तुत करने के आधार को पुख्ता पाते हुए अपील खारिज कर दी है।
ताम्रकार के अनुसार, न्यायाधीश का कहना है कि चूंकि आडियो में किसी की भी आवाज को बनाकर पेश किया जा सकता है, इसलिए इस मामले में रिकार्ड आवाज पर्याप्त सबूत नहीं हो सकती है।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि आरोपियों के बचाव के लिए साक्ष्य पेश करने के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकता है।
ज्ञात रहे कि नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने छापा मारकर तीन करोड़ रुपये से अधिक नगदी तथा करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति जब्त की थी और 12 अधिकारियों, कर्मचारियों को आरोपी बनाया है।
आर्थिक अपराध शाखा द्वारा मारे गए छापे में कुछ अफसरों और कर्मचारियों के कार्यालय एवं निवास में बड़ी मात्रा में नगदी मिली थी तथा आय से अधिक संपत्ति का भी खुलासा हुआ था। इस छापे के बाद प्रमुख सचिव स्तर के एक अधिकारी सहित नान के एमडी को तत्काल पद से हटा दिया गया था।
नान घोटाला मामले में 12 आरोपियों की रिमांड अवधि 14 मई को समाप्त हो रही है। इस संबंध में आरोपियों की ओर से रिकार्ड आवाज को साक्ष्य मानने का अनुरोध किया गया था।
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