रायपुर, 22 दिसंबर (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सर्वसम्मति से राज्य के निक्षेपकों के हितों का संरक्षण (संशोधन) अधिनियम-2015 पारित हो गया। पारित विधेयक में आम जनता से धन जमा कर कपटपूर्ण तरीके से राशि को गायब करने तथा वापस न करने वाले व्यक्तियों, कंपनियों एवं वित्तीय स्थापनाओं पर दंडात्मक कार्रवाई के प्रावधान हैं।
मुख्यमंत्री और वित्त विभाग के भारसाधक मंत्री डॉ. रमन सिंह ने विधानसभा में संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया। पारित विधेयक में कड़े प्रावधान करते हुए दोषी व्यक्तियों व कंपनियों को न केवल समय-सीमा के भीतर सख्त दंड दिया जा सके तथा आम जनता की राशि की वापसी हो, बल्कि उस क्षेत्र में कार्यरत वित्तीय स्थापनाओं पर प्रभावी रूप से निरंतर नजर रखी जा सके।
संशोधन विधेयक में मुख्य रूप से प्रस्तावित प्रावधान के अनुसार इस तरह के अपराधों को सं™ोय तथा गैर-जमानती घोषित किया गया है तथा दोष साबित होने पर दिए जाने वाले अर्थदंड में बढ़ोतरी की गई है। प्रकरण में विशेष न्यायालय द्वारा 240 दिवस के भीतर कार्रवाई पूर्ण करने का प्रावधान रखा गया है।
सक्षम प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट) को जब्ती, वित्तीय स्थापनाओं से जानकारी प्राप्त करने, उनकी आस्तियों का निर्धारण करने तथा पुलिस व अन्य संबंधित कार्यालयों से जानकारी मंगाने और सहायता लेने के लिए शक्तियां प्रदान की जा रही हैं।
वित्तीय स्थापनाओं को सक्षम प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट) को नियमित रूप से संपूर्ण जानकारी देना अनिवार्य होगा, जिसमें वित्तीय स्थापनाओं के मालिक, संचालक सम्पत्ति एवं जमा राशि का विवरण तथा जिले में उनके द्वारा चलाई जा रही जमा राशि योजनाओं की जानकारी होगी। इससे संबंधित जानकारी नहीं दिए जाने पर अर्थदंड को बढ़ाने का प्रावधान रखा गया है।
सक्षम प्राधिकारी (जिला मजिस्ट्रेट) को किसी वित्तीय स्थापना के द्वारा निक्षेपकों की राशि पूर्व में तय अवधि पर वापस न करने या धोखाधड़ी की प्रथम ²ष्टया जानकारी होने पर संबंधित वित्तीय स्थापना व उसके मालिकों या अंशधारकों की संपत्ति को जब्त करने के लिए स्पष्ट अधिकार व प्रक्रिया स्थापित की गई है। वित्तीय स्थापनाओं द्वारा दिए जाने वाले भ्रामक विज्ञापनों को दंडनीय भी बनाया गया है।
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