उन्होंने कहा कि पढ़ाई करने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती। पढ़ना, लिखना और सीखना हर उम्र में हो सकता है। साक्षरता निरक्षर व्यक्ति की जिंदगी में नई रोशनी भर देती है। इससे व्यक्ति में नए उमंग और आत्मविश्वास का संचार होता है। इसका लाभ उठाकर वे जीवन में आगे और पढ़ने तथा बढ़ने की राह पर अग्रसर होते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “जब छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ तो हमारे सामने कई चुनौतियां थीं। इनमें साक्षरता भी एक बड़ी चुनौती थी। इसे राज्य में चलाए जा रहे साक्षर भारत के सफल क्रियान्वयन की बदौलत से हमने इसका सामना किया और सफलता प्राप्त की है। आज हम साक्षर ही नहीं, बल्कि डिजिटल साक्षर भी हो रहे हैं। हमारा उद्देश्य छत्तीसगढ़ को शत-प्रतिशत साक्षर बनाना है। इसके लिए पचास फीसदी से कम साक्षर जिलों में विशेष प्रयास करने की जरूरत है।”
डॉ. सिंह ने मुख्य अतिथि की आसंदी से समारोह में साक्षर भारत कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्यो के लिए राज्य की विभिन्न लोक शिक्षा समितियों, अनुदेशकों और प्रेरकों को सम्मानित किया और ‘मुख्यमंत्री शहरी साक्षरता कार्यक्रम’ का भी शुभारंभ किया।
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