सामने ही एक नाला था, पार जाना लगभग असंभव था, ऐसे में एंबुलेंस कर्मियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए नाले के किनारे गाड़ी रोककर दोनों पैदल ऊबड-खाबड़ रास्ते पर 3 किलोमीटर का सफर तय कर ओलेझरपारा गांव पहुंचे। वहां से कुर्सी पर प्रसूता महिला को बैठाकर उसे रस्सियों के सहारे बांस में बांधा और कंधे पर लादकर पैदल ही एम्बुलेंस की ओर निकल पड़े।
यह जानकारी बुधवार को मुख्यमंत्री के संसदीय सचिव मोतीराम चंद्रवंशी ने दी। उन्होंने कहा कि जयंती बाई को मर्दापाल स्थित स्वास्थ्य केन्द्र ले जाकर डिलीवरी कराई गई, जिसमें मां और बच्चे दोनों ही स्वस्थ हैं।
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