नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर से सोमवार को कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ 2015 से यहां प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों को भी हटा दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पूर्व सैनिकों ने आरोप लगाया है कि उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उनमें से कुछ जख्मी भी हो गए।
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने अपने 5 अक्टूबर के आदेश में कहा था कि जंतर मंतर से धरना-प्रदर्शन करने वालों को हटा दिया जाए। अब आगे से यहां पर प्रदर्शन पर प्रतिबंध रहेगा।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि एनजीटी के आदेश के तहत प्रदर्शनकारियों के 32 समूहों के करीब 150 लोगों को वहां से हटा दिया गया है। पुलिस की दो कंपनियां जंतर-मंतर पर तैनात की गई हैं ताकि वहां फिर से प्रदर्शनकारी नहीं पहुंच सकें।
वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) की मांग को लेकर पूर्व सैनिकों का एक हिस्सा यहां 2015 से प्रदर्शन कर रहा था। हालांकि सरकार ने ओआरओपी को लागू किया है लेकिन इनका कहना है कि इसमें कई त्रुटियां हैं।
पूर्व सैनिकों के संयुक्त मोर्चा के सलाहकार मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) सतबीर सिंह ने कहा कि पूर्व सैनिकों को जबरन हटाया गया और इस दौरान एक महिला समेत तीन लोगों को चोट लगी।
सिंह ने आईएएनएस को बताया, “हमें सुबह 7.30 बजे के करीब निर्दयतापूर्वक वहां से हटा दिया गया। पुलिस नगर निगम अफसरों के साथ आई थी। उन्होंने हमारे साथ धक्का-मुक्की की और हमारा सामान ले लिया। हालांकि हम उनसे कह रहे थे कि अगर हमें नई जगह दिला दी जाए (प्रदर्शन के लिए) तो हम शाम तक यहां से चले जाएंगे।”
उन्होंने बताया कि उन लोगों को शाम चार बजे तक पुलिस स्टेशन में रखा गया। उन्होंने कहा कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।
सतबीर सिंह ने कहा, “प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक जगह कहां है? रामलीला मैदान? वे एक दिन का पचास हजार रुपया मांग रहे हैं और वहां शौचालय तक नहीं है। हमसे वहां प्रदर्शन जारी रखने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? अगर प्रधानमंत्री समझते हैं कि हमारी आवाज ऐसे दबाई जा सकती है, तो मैं राष्ट्र से अपील करूंगा कि सरकार से पूछें कि सरकार ऐसा क्यों कर रही है। यह लोकतंत्र की हत्या है।”
एनजीटी ने पांच अक्टूबर के अपने आदेश में दिल्ली के प्रदर्शन स्थल पर किसी भी तरह के प्रदर्शन, सभा और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी और अधिकारियों से वहां के अस्थाई-स्थाई सभी ढांचों को हटाने को कहा था। एनजीटी ने कहा था कि अब आगे से सभी धरना-प्रदर्शन दिल्ली के अजमेरी गेट स्थित रामलीला मैदान में होंगे।
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