जग्गी वासुदेव आने वाले समय के राम रहीम : मेधा पाटकर (साक्षात्कार)

भोपाल, 29 नवंबर (आईएएनएस)। नदियों को बचाने और उनके संरक्षण के लिए ‘रैली फॉर रिवर’ निकालने वाले सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने बड़ा हमला बोला है। उनका कहना है कि जिस पर कई तरह के संगीन आरोप हैं, वह उद्योगपतियों के इशारे पर नदियों की वकालत कर रहा है, वह आने वाले समय का दूसरा राम रहीम साबित होगा।

भोपाल, 29 नवंबर (आईएएनएस)। नदियों को बचाने और उनके संरक्षण के लिए ‘रैली फॉर रिवर’ निकालने वाले सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने बड़ा हमला बोला है। उनका कहना है कि जिस पर कई तरह के संगीन आरोप हैं, वह उद्योगपतियों के इशारे पर नदियों की वकालत कर रहा है, वह आने वाले समय का दूसरा राम रहीम साबित होगा।

भोपाल जनउत्सव में हिस्सा लेने आईं मेधा ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, “जग्गी वासुदेव कौन है। इसे कम लोग जानते हैं, इस पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप है, कोयंबटूर में ईशा फाउंडेशन का जो आश्रम है, वह संरक्षित वन क्षेत्र (रिजर्व फारेस्ट) में है, इस आश्रम के कई भवनों को तोड़ने के आदेश हैं, यह आश्रम जिस जगह है, वह एलीदेंट कॉरीडोर से गुजर रहा है, यही कारण है कि हाथियों की मौत हो रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “जो व्यक्ति पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, वह अब नदी को बचाने के लिए ‘रैली फॉर रिवर’ निकाल रहा है, इसके पीछे कौन है। कौन है ये व्यक्ति, इसे जानना होगा। इनकी जहां-जहां रैली या कार्यक्रम होते हैं, उन मंचों पर अडानी व अंबानी और उनके समर्थकों के पोस्टर लगे होते हैं। वहीं तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों को घेर रखा है। शिवराज सिंह चौहान ने अपने घर आमंत्रित किया और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उनकी तारीफ कर रहे हैं।”

कोयंबटूर में जग्गी वासुदेव ने आदियोगी की एक विशाल प्रतिमा स्थापित की, जिस कार्यक्रम में शायद शिवराज सिंह चौहान के कहने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हिस्सा लिया। इसके चलते उनका आश्रम एक पर्यटक स्थल बन गया है। एक तरफ वह आध्यात्म और योग की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ उनकी जीवन शैली क्या है, यह भी देखना होगा।

रैली फॉर रिवर के लिए चलाए गए मिस्डकॉल अभियान का जिक्र करते हुए मेधा ने कहा, “इस तरह के अभियान कई लोगों ने चलाए, उनके इस अभियान में ऊपरी तौर पर समर्थन मिल गया हो, इससे नदियां बचें यह बुनियादी बात नहीं है। उन्होंने कभी भी बड़े बांध, नदी प्रदूषण, खनन की बात ही नहीं की। बस वे नदी के दोनों ओर पेड़ लगाने की बात कर रहे हैं।”

मेधा ने आरोप लगाया, “जग्गी वासुदेव ने अपने अभियान के जरिए 800 करोड़ रुपये भी जुटाए हैं। वे पेड़ लगाने की बात तो करते हैं, मगर जो पेड़ डूब रहे हैं, उससे अनजान हैं। वे तो कॉरपोरेट के एजेंडे को पूरा कर रहे हैं। जिस दिन इन पर लगे आरोप साबित होंगे, उस समय ये राम रहीम की तरह सामने आएंगे। मगर आज उनके आगे मत्था टेकने का जो लोग काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ समाज और नदी प्रेमियों को जागृत करेंगे।”

मेधा ने आगे कहा, “जग्गी वासुदेव को यह बताना चाहिए कि क्या वे नदियों के विशेषज्ञ हैं, अपने साथ वैज्ञानिकों को रखते हैं, या यूॅ ही हर जगह अपने को नदी संरक्षक बनाकर पेश करते हैं।”

मेधा ने औद्योगिक घरानों की कार्यशैली पर सवाल उठाया, “नदियां कॉरपोरेट का लक्ष्य बन गई हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि नदियों के पानी के बगैर उनका अभियान पूरा नहीं हो सकता। यही कारण है कि उद्योगपति नदी घाटी में जमीन मांग रहे हैं।”

नर्मदा नदी का जिक्र करते हुए मेधा ने कहा, “गुजरात में नर्मदा के पानी का बड़ा हल्ला प्रधानमंत्री द्वारा किया जा रहा है। जबकि हकीकत यह है कि नर्मदा को गुजरात के लिए खत्म कर दिया गया है। सरदार सरोवर के नीचे की ही नर्मदा सूखी है। भरुच और एचुरी तक देखकर लौटी हूं, वहां देखा कि सरदार सरोवर से नारेश्वर तक सौ किलोमीटर नर्मदा सूख गई है।”

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