जयललिता की रिहाई के खिलाफ सर्वोच्च न्यायलय पहुंचा कर्नाटक (लीड-1)

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता, उनकी सहयोगी शशिकला नटराजन एवं दो अन्य को आय से अधिक संपत्ति मामले में बरी करने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

कर्नाटक सरकार ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर जयललिता, शशिकला एवं अन्य को बरी किए जाने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के 11 मई के फैसले पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।

कर्नाटक सरकार ने अपनी याचिका में कहा, “तत्काल निष्पक्ष अंतरिम आदेश जारी कर 11 मई को सुनाए गए अंतिम फैसले पर रोक लगाई जाए।”

कर्नाटक सरकार ने कहा कि उच्च न्यायालय (कर्नाटक) ने जयललिता, उनके सहयोगी और उनसे जुड़ी कंपनियों द्वारा लिए गए 241,731,274 रुपये के ऋण के आंकलन में भारी भूल की है, जबकि कुल 10 ऋण के तहत 106,731,274 रुपये का कर्ज लिया गया है।

हिसाब में हुई इस भारी भूल की वजह से उच्च न्यायालय ने 8.12 फीसदी आय से अधिक संपत्ति का हिसाब लगाया, जबकि यह 76.7 फीसदी है।

कर्नाटक सरकार ने याचिका में कहा कि जयललिता को आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी ठहराने के निचली अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय द्वारा पलट दिया जाना ‘न्याय की हत्या’ है।

याचिका में कहा गया है कि इस भूल की वजह से जयललिता, शशिकला, वी. एन. सुधाकरन और जे. इलावारसी गंभीर आरोपों से बरी हो गए।

कर्नाटक सरकार ने याचिका में सवाल उठाया है कि क्या कर्नाटक को प्रतिवादी बनाए बगैर जयललिता का निचली अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में जाना उचित है।

कर्नाटक सरकार ने तर्क दिया कि जयललिता और बरी किए गए अन्य लोगों ने मामले में कर्नाटक सरकार को प्रतिवादी के रूप में शामिल नहीं किया, इसलिए वे अपना पक्ष रखने के लिए सरकारी अधिवक्ता की नियुक्ति नहीं कर सकते थे।

उल्लेखनीय है कि बेंगलुरू की निचली अदालत ने 27 सितंबर को जयललिता को आय से अधिक संपत्ति और अज्ञात स्रोतों से आय के मामले में चार वर्ष जेल की सजा सुनाई थी और 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

यह मामला 1991 से लेकर 1996 के बीच जयललिता के मुख्यमंत्रित्व काल का है।

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