नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से जुड़े एक मामले में सर्वोच्च न्यायालय अगले सप्ताह फैसला सुनाएगा। मामला कर्नाटक उच्च न्यायालय में विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) जी. भवानी सिंह की नियुक्ति से संबंधित है, जिसे द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेता के. अंबाझगन ने चुनौती दी है।
न्यायालय ने अंबाझगन की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में अगले सप्ताह फैसला सुनाया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने आय से अधिक संपत्ति मामले में अपनी सजा को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसकी सुनवाई में तमिलनाडु सरकार ने भवानी सिंह को एसपीपी के तौर पर नियुक्त किया है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को कहा कि 15 अप्रैल को फैसला सुनाया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय से इस मामले में तब तक जयललिता की अपील पर कोई फैसला नहीं देने के लिए कहा।
उल्लेखनीय है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 11 मार्च को जयललिता की याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया था।
अंबाझगन ने एसपीपी के रूप में भवानी सिंह की नियुक्ति को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देते हुए तर्क दिया है कि मामले को तमिलनाडु से कर्नाटक स्थानांतरित करने के बाद उनकी नियुक्ति तमिलनाडु सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
कर्नाटक सरकार ने भी एसपीपी के रूप में भवानी सिंह की नियुक्ति का विरोध किया था, लेकिन वह कोई तर्कसंगत निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई थी।
वहीं दूसरी ओर जयललिता ने तर्क दिया है कि जब एक वकील को एक आपराधिक मामले की सुनवाई में एसपीपी नियुक्त किया जाता है, तो निचली अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले के साथ ही उसकी भूमिका समाप्त नहीं हो जाती, बल्कि निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अपील में भी वह बरकरार रह सकता है।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि एसपीपी की नियुक्ति केवल निचली अदालत तक सीमित नहीं हो सकती, क्योंकि मामले की सुनवाई कई चरणों में हुई है और कानूनी प्रावधानों के तहत चूंकि मामले की अपील उच्च न्यायालय में हुई है, इसलिए लोक अभियोजक बरकरार रहेगा।
उल्लेखनीय है कि बेंगलुरू की अदालत ने बीते साल 27 सितंबर को जयललिता, उनकी पूर्व सहयोगी शशिकला नटराजन, वी.के.सुधाकरन तथा जे.इलावारसी को साल 1991 से 1996 के बीच 66.65 करोड़ रुपये के आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी करार दिया था। इस अवधि में वह तमिलनाडु की मुख्यमंत्री थीं।
सर्वोच्च न्यायालय ने बीते साल 17 अक्टूबर को जयलिता और उनके सहयोगियों को जमानत दे दी थी।
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