जर्मनी में भारतीय कंपनियों का 2016 में राजस्व 11.4 अरब यूरो : सीआईआई

नई दिल्ली, 3 दिसम्बर (आईएएनएस)। जर्मनी में करीब 80 भारतीय कंपनियों ने 2016 में 27,400 कर्मचारियों को रोजगार प्रदान कर 11.4 अरब यूरो की कुल कमाई की है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने इस मामले पर आयोजित संयुक्त अध्ययन का हवाला देते हुए इस बात की जानकारी दी।

प्रमुख भारतीय मुख्य कार्यकारियों के साक्षात्कारों के आधार पर बर्टल्समैन फाउंडेशन, अन्स्र्ट एंड यंग (ईवाई) और सीआईआई द्वारा किए गए अध्ययन में पता चला है कि 2010 से भारतीय कंपनियों द्वारा जर्मनी में लगभग 140 प्रमुख निवेश परियोजनाएं शुरू की गई हैं।

सीआईआई की एक विज्ञप्ति में कहा गया है, “इसमें एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) घोषणाओं के साथ साथ एमएंडएएस (विलय और अधिग्रहण) शामिल हैं।”

विज्ञप्ति में कहा गया है, “2010 और 2016 के बीच, यूरोप में 96 परियोजनाओं के साथ जर्मनी, भारतीय एफडीआई का दूसरा सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता था।”

अध्ययन के अनुसार, भारत द्वारा निवेश के शीर्ष क्षेत्र में ऑटोमोबाइल, धातु व धातु प्रसंस्करण, पेशेवर, तकनीकी और वैज्ञानिक सेवाएं, फार्माश्यूटिकल्स और रसायन, इलेक्ट्रोटेक्निक और मशीन बिल्डिंग शामिल हैं।

अध्ययन में पाया गया है कि जर्मनी में भारतीय कंपनियां धातुओं (40 प्रतिशत) और ऑटोमोटिव (29 प्रतिशत) के श्रमिक क्षेत्रों में अपने कारोबार का लगभग 70 प्रतिशत उत्पादन करती हैं। इन क्षेत्रों में प्रमुख उत्पादक टाटा स्टील, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और सोना ऑटोकॉम्प हैं।

सीआईआई ने कहा, “राजस्व में भारतीय आईटी उद्योग की नौ फीसदी हिस्सेदारी है।”

बर्टल्समैन स्टिफटुंग के मुरली नायर के अनुसार, जर्मनी को विदेशी निवेशकों की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करने के लिए, अवसंरचना के लिए कर राहत, नवाचार में सरकारी प्रोत्साहन पर अधिक ध्यान देना चाहिए।

इसके अलावा, सर्वेक्षण में 90 फीसदी भारतीय मुख्य कार्यकारी अधिकारियों का यह मानना था कि यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने से जर्मनी एक निवेश स्थान के रूप में आगे आएगा और देश में भारतीय निवेश की मात्रा और विविधता को बढ़ाने में मदद करेगा।

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