भोपाल, 26 नवंबर (आईएएनएस)। शायद ही दुनिया में ऐसा कोई पर्यावरण प्रेमी होगा जिसने भोपाल के ‘बड़े तालाब’ का नाम न सुना हो। पेरिस में 30 नवंबर से होने वाले जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन (सीओपी-21) में इसी तालाब के पानी के साथ भारत की ओर से विश्व बंधुत्व का संदेश दिया जाएगा।
भोपाल, 26 नवंबर (आईएएनएस)। शायद ही दुनिया में ऐसा कोई पर्यावरण प्रेमी होगा जिसने भोपाल के ‘बड़े तालाब’ का नाम न सुना हो। पेरिस में 30 नवंबर से होने वाले जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन (सीओपी-21) में इसी तालाब के पानी के साथ भारत की ओर से विश्व बंधुत्व का संदेश दिया जाएगा।
हाल ही में स्टॉकहोम वाटर प्राइज से सम्मानित और दुनिया में ‘जलपुरुष’ के रूप चर्चित डॉ. राजेंद्र सिंह ने बड़े तालाब का पानी एक डिब्बे में भरा और विश्व शांति जल यात्रा निकालकर अपनी पेरिस यात्रा की शुरुआत की।
एक कार्यशाला में भाग लेने मंगलवार को मध्य प्रदेश की राजधानी आए डॉ. सिंह बुधवार को अपने साथियों के साथ भोपाल के बड़े तालाब पहुंचे, वहां का जायजा लिया और तालाब का पानी एक डिब्बे में भरा। यह पानी वह पेरिस में होने वाले जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में अपने साथ ले गए।
बुधवार की रात पेरिस रवाना होने से पहले राजेंद्र सिंह ने आईएएनएस से फोन पर कहा कि वह पेरिस के जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधियों को भोपाल के तालाब का पानी देकर विश्व बंधुत्व का संदेश देना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से वह इस ऐतिहासिक नगरी के तालाब का पानी अपने साथ पेरिस ले जा रहे हैं।
डॉ. सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पेरिस का सम्मेलन जलवायु परिवर्तन के विचार-विमर्श का बड़ा मंच है, जहां दुनियाभर के विशेषज्ञ, राजनेता और उद्योग जगत से जुड़े लोग जमा हो रहे हैं, इस मंच से वह नदी और तालाब बचाने और इस मसले पर एकजुट होने का संदेश देना चाहते हैं, इसके लिए वह पेरिस पहुंचने वालों को भोपाल के तालाब का पानी देकर अपनी भावनाओं से अवगत कराएंगे।
उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के सामने जलवायु परिवर्तन एक बड़ी समस्या बन गई है। इसके लिए नजरिया बदलने का समय आ गया है, नदियों, तालाब को बचाने के साथ अंधाधुंध खड़े हो रहे सीमेंट के जंगलों और औद्योगिकीकरण के लिए सिर्फ नीति बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि कड़े फैसले भी लेने होंगे।
जलपुरुष ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “अगर अब नहीं जागे तो आने वाला समय हमें माफ नहीं करेगा।”
पेरिस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन 30 नवंबर से होने जा रहा है। इस सम्मेलन में 190 देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
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