पणजी, 30 जुलाई (आईएएनएस)। गोवा सरकार ने शनिवार को कर्नाटक में म्हादी अंतर्राज्यीय जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले के बाद उग्र हिंसक आंदोलन को देखते हुए वहां की सरकारी बसों की सेवा और दो दिनों के लिए स्थगित कर दी।
मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने ‘बड़े भाई’ कर्नाटक से राज्य में हिंसा रोकने और न्यायाधिकरण के अंतरिम फैसले को स्वीकार करने का आग्रह किया है। न्यायाधिकरण ने म्हादी नदी को मालाप्रभा नदी से जोड़ने का काम बंद करने को कहा है।
पारसेकर ने कहा, “हमने डर की वजह से अपने वाहन कर्नाटक भेजना स्थगित नहीं किया, बल्कि एहतियात के तौर पर ऐसा किया है। हमने इसे और दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। हम लोग छोटे भाई हैं, मैं एक बड़े भाई से यही कई बार आग्रह कर सकता हूं। बड़े भाई को छोटे भाई की भावना को समझना चाहिए।” पारसेकर ने सीमा पार हिंसा रोकने की भी अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा, “दोनों राज्य दुश्मन नहीं हैं। वैश्वीकरण के युग में दो देश भी एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हो सकते। यह सही नहीं है.। कर्नाटक और गोवा एक ही देश में दो राज्य हैं। गोवा एक छोटा राज्य है, कर्नाटक बड़ा है। हमलोग उसके छोटे भाई जैसे हैं। कानून के प्रावधान हमलोगों पर बाध्यकारी होने चाहिए। कर्नाटक यदि चाहे तो उसे न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ अपील करने का संवैधानिक अधिकार है।”
गोवा और कर्नाटक के बीच म्हादी नदी जल से जुड़ी विवादित कालसा-भांडुरा बांध परियोजना को लेकर केंद्रीय न्यायाधिकरण में विवाद चल रहा है।
गोवा में म्हादी को मांडवी नदी के रूप में भी जाना जाता है। इसे राज्य के उत्तरी हिस्से की जीवन रेखा के रूप में जाना जाता है। यह कर्नाटक से निकलती है और गोवा के पणजी में अरब सागर में जाकर मिलती है।
यह नदी 28.8 किलोमीटर कर्नाटक में है, जबकि 81.2 किलोमीटर गोवा में है।
कर्नाटक की योजना इस पर सात बांध बनाने की है। इसके साथ ही इसके जल को जल की कमी से जूझ रही उत्तरी कर्नाटक की नदी मालाप्रभा से जोड़ने की है। गोवा सरकार और गोवा की सिविल सोसाइटी समूहों का कहना है कि नदी का पानी मोड़ने का राज्य के उत्तरी इलाके पर बहुत खराब प्रभाव पड़ेगा। उत्तरी क्षेत्र सिंचाई, पेयजल आपूर्ति एवं मछली के लिए इसी पर निर्भर है।
पारसेकर ने कहा कि म्हादी नदी विवाद के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं है।
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