खंडवा, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पिछले 17 दिन से पानी में रहकर जल सत्याग्रह कर रहे सत्याग्रहियों के पैरों की खाल गल रही है, खून रिस रहा है और मछलियां उसे अपना निवाला बनाए जा रही हैं, मगर सत्याग्रहियों का जोश बरकरार है। वहीं चिकित्सकों के एक दल ने सोमवार को सत्याग्रहियों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया।
खंडवा जिले में नर्मदा नदी पर बने ओंकारेश्वर बांध का जलस्तर 189 मीटर से बढ़ाकर 191 मीटर कर दिया है, इसके चलते कई खेत पानी में डूब चुके हैं तो कई खेतों की ओर पानी बढ़ रहा है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ किसान और नर्मदा बचाओ आंदोलन के सदस्य 11 अप्रैल से घोगलगांव में जल सत्याग्रह कर रहे हैं। जल सत्याग्रह किए जाने से खेत पानी से डूब रहे हैं और सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो चला है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नर्मदा बचाओ आंदोलन के वरिष्ठ कार्यकर्ता और आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक आलोक अग्रवाल ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि पुर्नवास नीति का राज्य में पालन नहीं हो रहा है, प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिल रहा है, किसान आज अपना हक पाने के लिए आंदोलन किए जा रहे हैं तो उसका सरकार मजाक उड़ाने पर लगी हुई है।
अग्रवाल ने कहा कि किसानों के पैर गल रहे हैं, खून रिस रहा है, मगर सरकार के कान में जू नहीं रेंग रहा है। सरकार अपनी जिद पर अड़ी है, मगर उसे किसानों की समस्या को देखने की फुर्सत नहीं है।
सत्याग्रहियों के स्वास्थ्य का परीक्षण करने चिकित्सकों का दल घोगलगांव पहुंचा। चिकित्सकों ने सत्याग्रहियों को परामर्श दिया है कि वे अपना इलाज कराएं, मगर सत्याग्रही इसके लिए तैयार नहीं हुए।
वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान साफ कर चुके हैं कि बांध का जलस्तर बढ़ाया जा चुका है, उसे किसी भी कीमत पर कम नहीं किया जाएगा। वहीं सरकार की ओर से सोमवार को एक बयान जारी किया गया है, जिसमें 23 अप्रैल को हुई नर्मदा घाटी विभाग के राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य के साथ भोपाल में हुई आंदोलनकारियों के प्रतिनिधियों की बैठक का ब्योरा दिया गया है।
सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्यमंत्री ने आंदोलनकारियों से जलाशय से हटने की अपील की तो आंदोलनकारी जलाशय खाली करने पर अड़े रहे।
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