खंडवा, 7 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में ओंकारेश्वर बांध का जल स्तर बढ़ाए जाने से डूब में आए क्षेत्र के लोगों का जल सत्याग्रह घोगलगांव में गुरुवार को 27वें दिन भी जारी रहा। सत्याग्रहियों ने एलान किया है कि वे मर जाएंगे मगर हक पाए बगैर पानी से बाहर नहीं आएंगे।
जल सत्याग्रह कर रहे लोगों का स्वास्थ्य बद से बदतर होता जा रहा है, पैरों का बुरा हाल है, खून रिस रहा है और पैरों की खाल मछलियों का निवाला बन रही है। साथ ही खड़े हो नहीं पा रहे हैं। सत्याग्रह का नेतृत्व कर रहे नर्मदा बचाओ आंदोलन के अलोक अग्रवाल की हालत भी काफी बिगड़ गई है और उन्हें नित्यकर्म के लिए भी उठा कर ले जाना पड़ रहा है।
जल सत्याग्रह करने वालों ने तय कर लिया है कि बिना मांगे माने वे सत्याग्रह खत्म नहीं करेंगे। उन्होंने एक सुर में कहा कि हक पाने के लिए चाहे उन्हें अपने प्राणों की आहुति भी क्यों न देना पड़ जाए, मगर वे हक पाए बगैर पानी से बाहर नहीं आएंगे।
आंदोलनकारियों की मांग है कि उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए और जमीन के बदले जमीन दी जाए। नर्मदा बचाओ आंदोलन की चितरुपा पालित ने बताया कि बुधवार को ओंकारेश्वर बांध प्रभावितों की तरफ से आठ प्रभावितों के एक दल को नरसिंहपुर जिले में सरकार की ओर से 350 हेक्टेयर जमीन दिखाने के लिए ले जाया गया था।
पालित का आरोप है कि वहां ले जा कर उन्हें कुछ ही जमीन दिखाई गई, जो कि अतिक्रमित, बंजर, एवं अनुपजाऊ थी। सरकार ने फिर से विस्थापितों को धोखा देने की कोशिश की और विस्थापित इस तरह की जमीन लेने के लिए सहमत नहीं है और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की आवहेलना भी है जिसमे अधिग्रहित की गई जमीन से अच्छी जमीन विस्थापित को देनी होती है।
dharmpath.com dharmpath