नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। भारत ने बुधवार को कहा कि कथित जासूस कुलभूषण जाधव से राजनयिक संपर्क के आग्रह को पाकिस्तान द्वारा 16 बार इंकार करने पर भारतीय नागरिक का जीवन बचाने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक अदालत (आईसीजे) जाने का ‘फैसला सावधानीपूर्वक सोच-विचारकर’ किया गया।
कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने जासूसी के लिए मौत की सजा सुनाई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने जाधव के मामले पर कहा, “जीवन पर खतरे का सामना कर रहे एक नागरिक के हित को ध्यान में रखकर और न्याय सुनिश्चित करने के लिए यह सावधानीपूर्वक सोच-विचारकर फैसला किया गया।”
पाकिस्तान द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया और मौत की सजा को ‘अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ करार देते हुए बागले ने कहा कि भारत को मामले में दस्तावेज और आरोप-पत्र मांगने पर पाकिस्तान से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
बागले ने यह भी कहा कि जाधव के माता-पिता द्वारा अपने पुत्र से मिलने के लिए वीजा आवेदन पर कोई जवाब नहीं दिया गया।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि आईसीजे ने मंगलवार को जाधव की मौत की सजा को निलंबित कर दिया।
उन्होंने ट्वीट किया, “मैंने कुलभूषण जाधव की मां से बात की, आईसीजे अध्यक्ष के आदेश के बारे में बताया।”
उन्होंने कहा कि कानून के जानकार हरीश साल्वे इस मामले में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
भारत ने मामले में सोमवार को अदालत से राहत की मांग की थी, जिसमें ‘आरोपी की सजा निलंबित करने, उसके निलंबन’ और ‘सैन्य अदालत द्वारा दी गई सजा को तामील करने से पाकिस्तान को रोकने’ की मांग की गई थी।
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