तोक्यो, 4 जनवरी (आईएएनएस)। जापान में पिछले साल 140 कंपनियों पर किए गए साइबर हमलों में 20 लाख से ज्यादा निजी आंकड़े चोरी हो गए या जिनके सार्वजनिक रूप से जाहिर होने का खतरा पैदा हो गया है।
इन 140 कंपनियों में से 75 ने कहा कि उन्हें आंकड़ों की चोरी की जानकारी तब मिली, जब उन्हें पुलिस या दूसरे बाहरी समूहों ने बताया।
जापान टाइम्स में प्रकाशित खबर के मुताबिक, साइबर हमले का शिकार हुई कंपनियों में 69 निजी कंपनियां हैं, 49 सरकारी एजेंसी व उनकी सहयोगी कंपनियां है और 22 विश्वविद्यालय हैं।
जिन कंपनियों के आंकड़ों में सेंध लगी उनमें से 40 कंपनियों ने कहा उन्हें निशाना बनाया जा रहा है कि इसकी जानकारी उन्हें थी।
जापान पेंशन सर्विस जोकि देश का सबसे बड़ा पेंशन प्रदाता है, के 12.5 लाख से ज्यादा लोगों के आईडी नंबर, नाम, पते और जन्मदिन के आंकड़े चोरी हो गए।
सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जो जानकारी सामने आई है वह साइबर हमले का बहुत छोटा सा हिस्सा है। कई ऐसी कंपनियां हैं, जिनको पता भी नहीं होगा कि उन्हें निशाना बनाया गया है।
मतसुयामा स्थित बेवसाइट निर्माता और प्रिटिंग कंपनी सेकीको.इन के इहाइम प्रिफेक्टर का कहना है कि अनुमान है कि लगभग 2 लाख 10 हजार निजी आंकड़ों में सेंध लगी है। वहीं सिजूयोका शहर की कंपनी तमिया इंक. ने कहा है कि लगभग 1 लाख 7 हजार निजी आंकड़ों की चोरी हुई है।
वहीं, 22 संस्थाओं ने पुष्टि की है कि उन्हें डीडीओएस (डिस्ट्रीब्यूटेड डिनाइल ऑफ सर्विस) हमले का निशाना बनाया गया। इस हमले में किसी वेबसाइट को निशाना बनाकर कई ोतों से उसे एक साथ लगातार खोला जाता है, जिसके उस वेबसाइट पर सामान्य से कहीं ज्यादा ट्रैफिक बढ़ जाता है। इससे सर्वर बंद हो जाने से वेबसाइट काम करना बंद कर देता है।
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के आधिकारिक वेबसाइट पर भी अनजान हैकरों ने डीडीओएस हमला किया। इन हैकरों ने जापान द्वारा अनुसंधान के लिए अंटार्टिका में व्हेल मछली का शिकार शुरू करने का सांकेतिक विरोध किया था। पिछले महीने यह वेबसाइट अस्थायी तौर पर बंद हो गई थी।
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