नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एक समाचार चैनल से कहा है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक पर व्यापक सहमति है और इसके लागू होने के बाद राज्यों को राजस्व के नुकसान की विपक्ष की जो आशंकाएं हैं, उसे दूर करने की कोशिश की गई है।
लोकसभा में जीएसटी को पारित करने के लिए उस पर मंगलवार को चर्चा होनी है।
अजरबैजान से मंगलवार को स्वदेश लौटे जेटली ने कहा, “मैंने राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ कई बैठकें की हैं। मैंने अधिकांश राजनीतिक दलों से बातचीत की है और इस मुद्दे पर व्यापक सहमति है।”
वित्त मंत्री ने कहा, “इससे अंतत: राज्यों को ही लाभ होगा। इससे भारत के विकास दर को फायदा होने जा रहा है। यह देश भर में वस्तु एवं सेवाओं के निर्बाध स्थानांतरण की सुविधा प्रदान करने जा रहा है। इससे कर संग्रह की मात्रा में बढ़ेगी और परेशानियों से निजात मिलेगा।”
कानून का रूप लेने के लिए जीएसटी विधेयक को संसद के दोनों सदनों से दो-तिहाई बहुमत और देश के आधे राज्यों की विधानसभाओं से पारित होने की जरूरत है। इसे देश के औद्योगिक विकास तथा व्यापारिक माहौल में सुधार की सुविधा के तौर पर देखा जा रहा है।
अगर नया विधेयक लागू होगा तो हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक कर लगेगा यानी वैट, उत्पाद शुल्क, सेवा कर और बिक्री कर की जगह सिर्फ एक ही कर लगेगा।
सरकार अप्रैल 2016 से पहले इसे लागू करने की तैयारी कर रही है।
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