जीव-जंतुओं की चीर-फाड़ पर होगी कार्रवाई

रायपुर, 27 मार्च (आईएएनएस)। प्रिवेंशन ऑफ एनिमल एक्ट के बाद भी कुछ कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रयोगशालाओं में जानवरों की चीर-फाड़ कराने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस पर निगरानी रखने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सीपीसीएसईए कमेटी बनाई है।

यह कमेटी वेबसाइट के माध्यम से संस्थाओं को जोड़कर जागरूक भी करेगी। साथ ही निमय तोड़ने वाली संस्थाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.जी.डी. शर्मा ने बताया कि विलुप्तप्राय जानवरों और जीव जंतुओं के चीर फाड़ पर यूजीसी ने पहले से रोक लगाई है। इसकी बजाय थ्रीडी तकनीक और आर्टिफिशियल डेमो के जरिए जानकारी देनी है। नए सर्कुलर में कमेटी गठन व वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य बताया गया है।

यूजीसी ने प्रैक्टिकल में जानवारों की चीर-फाड़ को गंभीरता से लिया है। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर कहा है कि कुछ संस्थाओं की लैब में प्रैक्टिकल के लिए जानवरों का इस्तेमाल हो रहा है। इस कारण अब कड़े नियम बनाए गए हैं।

साथ ही फॉर द पपर्स ऑफ कंट्रोल एंड सुपरविजन ऑफ एक्सपेरिमेंट ऑन एनीमल (सीपीसीएसईए) कमेटी बनाई गई है। इसी नाम से एक वेबसाइट भी बनाई गई है। इससे सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी को जोड़कर प्रैक्टिकल कार्य के बारे में जानकारी दी जाएगी।

यूजीसी ने इसके पूर्व भी सर्कुलर जारी कर लैब में जानवरों पर प्रैक्टिल पर रोक लगाई थी। कुछ संस्थाओं में इसका पालन नहीं होने की शिकायत मिल रही थी। हालांकि उनका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।

यूजीसी ने वेबसाइट पर 30 अप्रैल से पहले सभी कॉलेज और विश्वविद्यालय को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा है। रजिस्टर्ड होने के लिए एक हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट बनवाना होगा। इसकी स्कैन कॉपी अपलोड करनी होगी। वेबसाइट पर संस्था को मांगी गई जानकारी देनी होगी। इसके बाद उन्हें बताया जाएगा कि प्रैक्टिकल कैसे कराना है।

इन जानवरों और जीवों पर है रोक :

यूजीसी ने गाय, बंदर, कुत्ता, बिल्ली, खरगोश, चूहा, मेंढक, सांप, चिड़िया, मुर्गी समेत विलुप्त प्राय जानवर जीव और पक्षियों की चीर-फाड़ पर रोक लगाई है। हालांकि इसमें क्षेत्र के अंतर्गत कुछ को छूट दी गई है। प्रैक्टिकल के लिए अलग से आर्टिफिशियल डेमो का उपयोग करने कहा है। इसके लिए थ्रीडी चित्र और व रंगों का उपयोग शामिल है।

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