रिपोर्ट में हालांकि आगाह किया गया कि यह तकनीक पैदावार बढ़ाने में सहायक नहीं है, जैसा कि इसके कई समर्थकों का दावा है।
अमेरिकी की नेशनल एकेडमीज ऑफ साइंसेज, इंजीनियरिग एंड मशीन की ओर से जारी 408 पृष्ठों की रिपोर्ट में कहा गया कि संगठन को जी.ई. भोजन खाने और कैंसर, मोटापा, जठरांत्र पथ से संबंधित बीमारी, गुर्दे की बीमारी ऑटिज्म व एलर्जी सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के बीच कोई संबंध नहीं मिला है।
जी.ई.फसलों पर अध्ययन समिति के अध्यक्ष फ्रेड गौल्ड ने वाशिंगटन, डी.सी में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया, “हमारे पास अमेरिका और कनाडा में ऐसे लोग हैं, जो 20 वर्षो से जेनेटिकली इंजीनियर्ड फसलें खा रहे हैं, लेकिन हमें स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत का कोई सबूत नहीं मिला।”
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