नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। सिरीफोर्ट ऑडिटोरियम में चल रहे 7वें जागरण फिल्म फेस्टिवल (जेएफएफ) के तीसरे दिन मॉनसून का स्वागत करते हुए दर्शकों ने मीरा नायर निर्देशित फिल्म ‘मॉनसून वेडिंग’ और हंसल मेहता की ‘अलीगढ़’ देखने का लुत्फ लिया।
‘इंडियन फिल्म मीडिया एंड एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री’ विषय पर आयोजित मास्टर क्लास में चैतन्य चिंचलिकर सहित अन्य फिल्मकारों ने अपने विचार रखे। इस दौरान दर्शकों को फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न पहलुओं को जानने को मौका मिला।
दूसरे सत्र में जेएफएफ व फिक्की द्वारा ‘शॉर्ट कैन मेक यू बिग’ में फिल्म संपादक अजय ब्रह्मात्मज, मनोज बाजपयी व राजकुमार राव ने चर्चा की। इस सत्र में कई लघु फिल्म निर्देशक भी शामिल रहे।
तीसरे दिन ‘मॉनसून वेडिंग’ से हुई सशक्त शुरुआत को हंसल मेहता की मनोज बाजपयी व राजकुमार राव अभिनीत फिल्म ‘अलीगढ़’ ने आगे बढ़ाया। फिल्म खत्म होने पर दोनों सितारों ने दर्शकों से बातचीत की और अपने अनुभव साझा किए।
फिल्मों, स्पेशल स्क्रिनिंग और मास्टर क्लास की ट्रिपल खुराक ने सिरीफोर्ट ऑडीटोरियम में दर्शकों का उत्साह कायम रखा और दर्शक अलग-अलग ऑडीज में अपनी पसंदीदा फिल्मों को देखने के लिए एकत्र हुए।
यहां दिखाई गईं फिल्मों में महेश मांजरेकर की मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’, तनुजा चंद्रा निर्देशित ‘सिलवट’, रोमानिया सिनेमा ‘डिसकोर्डिया’, चर्चित मराठी फिल्म ‘सैरात’ और मेघना गुलजार की ‘तलवार’ पर भी जमकर चर्चा हुई।
इसी श्रेणी में 3 कलर्स (पारसी), वन नाइट बैंग (जापानी), विंटर्स जर्नी (जर्मनी), हॉरर वेकुई (स्पेन), द हीटवेव (स्पेन) और लिसनर शामिल रहीं। केतन मेहता निर्देशित ‘तोबा टेक सिंह’ भी तीसरे दिन का आकर्षण रही।
जागरण फिल्म फेस्टिवल के विषय में मनोज बाजपयी ने कहा कि जेएफएफ एक बहुत अच्छी अवधारणा है जो ऐसे दर्शकों को भी सिनेमा के जोड़ती है जो सिनेमाघरों में जाकर फिल्म नहीं देख पाते। देश के कुछ भागों का बड़ा दर्शक वर्ग इस समारोह के माध्यम से फिल्मों से जुड़ पाता है। मैं पूर्व में भी जागरण से जुड़ा रहा हूं, पिछले वर्ष इंदौर गया था।
मनोज ने कहा, “अलीगढ़ की यात्रा बहुत अच्छी रही है, जब से यह रिलीज हुई है लगातार आगे बढ़ रही है और हमें जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, जो काफी संतोषजनक है।”
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