जेपी अस्पताल में मरीज का दूसरी बार लिवर प्रत्यारोपण कर जान बचाई

नोएडा, 23 फरवरी (आईएएनएस)। नोएडा स्थित जेपी अस्पताल में चिकित्सकों की टीम ने जटिल लिवर प्रत्यारोपण को अंजाम देकर एक मरीज की जान बचाई है।

नोएडा सेक्टर 128 स्थित मल्टी सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा संस्थान जेपी अस्पताल के लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के वरिष्ठ सर्जन डॉ. अभिदीप चौधरी एवं उनकी टीम ने बिजनौर निवासी 47 वर्षीय धीनेंद्र सिंह धाम का दूसरी बार लिवर प्रत्यारोपण करने में सफलता पाई है।

शराब पीने के कारण धाम का लिवर साल 2008 में पहली बार खराब हुआ था। तब छोटे भाई वीरेंद्र सिंह (38 वर्ष) ने लिवर दान किया था। अब 8 साल बाद बड़ी बहन कुसुम (54 वर्ष) ने लिवर दान कर भाई की जान बचाई।

मरीज की बीमारी के बारे में बताते हुए लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अभिदीप चौधरी ने कहा, “शराब पीने के कारण साल 2008 में मरीज का लिवर खराब हो गया था और उस समय इसने अपना लिवर प्रत्यारोपण करवाया था। सर्जरी के बाद शराब छोड़ने के कारण मरीज का जीवन सामान्य हो गया था, लेकिन साल 2012 में रोगी ने दोबारा शराब का सेवन करना शुरू कर दिया, जिस कारण फिर से उसका लिवर खराब हो गया, साथ ही उसे पीलिया भी हो गया। रोगी के पेट में चारों तरफ पानी भर गया। इस बीमारी के कारण मरीज ‘लिवर कोमा एवं किडनी फैल्योर’ की स्थिति की ओर जा रहा था।”

डॉ. चौधरी ने बताया, “एक ही मरीज का दो बार लिवर प्रत्यारोपण करना बहुत ही जटिल प्रक्रिया होता है। सर्जरी में रक्त प्रवाह को सुचारू रूप से बनाए रखने के लिए रक्त वाहिकाओं को सही तरीके से जोड़ना बहुत कठिन काम होता है। दोबारा लिवर प्रत्यारोपण सर्जरी में सबसे अधिक परेशानी यह होती है कि पूर्व में जिन रक्त वाहिकाओं का इस्तेमाल किया गया है, उनमें से कुछ को बदलकर कृत्रिम रक्त वाहिकाओं को लगाना पड़ता है। इसके साथ ही दूसरी बार की सर्जरी में अधिक रक्तस्राव का जोखिम भी बढ़ जाता है। मरीज शारीरिक एवं मानसिक रूप से भी कमजोर होता है।”

विश्व भर में ऐसे कुछ ही मामले सामने आए हैं जब एक लिवर प्राप्तकर्ता ने कुछ वर्षो के अंतराल पर दो बार अपना लिवर प्रत्यारोपण कराया हो और दोनों बार जीवित दाता द्वारा लिवर दान लिया गया हो।

सर्जरी के सफल होने के बाद धीनेंद्र सिंह धाम ने बताया, “पहली बार लिवर प्रत्यारोपण के बाद मैं सामान्य जीवन जी रहा था। लेकिन, शराब पीने की अपनी लत से मैं अधिक दिनों तक छुटकारा नहीं पा सका। इसका परिणाम यह हुआ कि मेरा लिवर दोबारा खराब हो गया। सच कहूं तो जब दूसरी बार मेरा लिवर खराब हुआ तो मैं बुरी तरह डर गया था कि अब और अधिक दिनों तक शायद जीवित नहीं रह पाऊंगा। सर्जरी के बाद मैं अब पूरी तरह स्वस्थ हूं।”

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