मुंबई, 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र से रत्नागिरि लाई जाने वाली जैतापुर परमाणु परियोजना पर कुप्रभाव से संबंधित 418 पृष्ठों की एक विस्तृत रपट शिवसेना ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी है।
शिवसेना नेता और भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकार में पर्यावरण मंत्री रामदास कदम ने कहा कि पार्टी के सांसदों ने 9,900 मेगावाट के संयंत्र पर अपनी आशंकाएं व्यक्त करने के लिए नई दिल्ली में मोदी से मुलाकात की, इसके बाद यह रपट भेजी गई है।
कदम ने कहा, “मैंने कोंकण बचाओ समिति की आपत्तियों, माधवराव गाडगिल कमेटी की रपट, डॉक्टर बी. जे. वाघमारे जनहित समिति की जन सुनवाई की रपट और जैतापुर परियोजना को लेकर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) की जन सुनवाई की रपट को समाहित कर 418 पृष्ठों की एक विस्तृत रपट तैयार की है।”
रपट में इस बात को समझाया गया है कि यह परियोजना संवेदनशील क्षेत्र कोंकण और इसके आसपास के समुद्री जीवन को किस तरह प्रभावित करेगा, किसानों और मछुआरों पर इसका कितना असर होगा।
उन्होंने कहा कि जापान में फुकुशिमा परमाणु त्रासदी के बाद पूरी दुनिया परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल पर पुनर्विचार कर रही है और सौर ऊर्जा व अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे विकल्प अपनाने पर विचार कर रही है।
मंत्री ने कहा कि गोवा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी द्वारा पेश एक रपट के मुताबिक, समुद्री शैवाल की 24 प्रजातियां और मैनग्रोव की छह प्रजातियां परमाणु संयंत्र से अरब सागर में छोड़े जाने वाले अपशिष्ट पदार्थो के कारण नष्ट हो सकती हैं।
कदम ने जोर देकर कहा कि शिवसेना केन्द्र और राज्य सरकार को इस परियोजना को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं देगी।
हाल ही में इस परियोजना को मिली पांच साल की पर्यावरण मंजूरी 26 नवंबर को समाप्त हो गई और इसकी मियाद बढ़ाई नहीं गई है।
यद्यपि एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने कहा है कि पर्यावरण मंजूरी की मियाद जल्द ही बढ़ाए जाने की संभावना है, लेकिन जो इसका विरोध कर रहे हैं उनका कहना है कि मंजूरी की मियाद समाप्त होने के बाद उसे बढ़ाने का कोई प्रावधान कानून में नहीं है।
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