नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। नई दिल्ली के इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च (आईआईएचएमआर) ने स्वास्थ्य कर्मियों के लिए प्रबंधन विकास कार्यक्रम का आयोजन किया है, जिसमें जैविक कचरों के निस्तारण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 21 जनवरी से शुरू हुआ यह कार्यक्रम 23 जनवरी तक चलेगा।
यह कार्यक्रम जैव चिकित्सा अपशिष्ट (कचरा) प्रबंधन, स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रयासों, व्यावसायिक सुरक्षा मुद्दों और स्वास्थ्य निकायों तथा सरकार की भूमिका पर केंद्रित है।
शुक्रवार को विशेष रूप से जैविक कचरे का कारगर तरीके से निपटान पर चर्चा की गई। इस दौरान चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के कचरे से होने वाले खतरों को कम करने पर विमर्श किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली सरकार, ईएसआईसी और भारतीय रेलवे के अस्पतालों से जुड़े 21 चिकित्सकों, नर्सो और कई कर्मचारियों ने हिस्सा लिया।
गौरतलब है कि जैविक कचरे का ठीक से निस्तारण नहीं करने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने इस मामले में दिल्ली के 10 प्रमुख अस्पतालों को नोटिस जारी किया है।
जैविक कचरे का ठीक से निस्तारण नहीं होने से अस्पताल के स्टाफ और रोगियों के स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका बनी रहती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगर अस्पताल के कचरे का उचित तरीके से निस्तारण किया जाए, तो एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे संक्रामक रोगों से भी बचा जा सकता है।
आईआईएचएमआर के डीन डॉ. डी.के. अग्रवाल ने कहा, “स्वास्थ्य निकायों, अस्पतालों और सरकारों को बायोमेडिकल कचरे की समस्या की तरफ तुरंत ध्यान देने की जरूरत है, ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचे। साथ ही संक्रमण तथा दूसरे हादसों से भी से बचा जा सके।”
इस दिशा में जरूरी है कि जैव कचरे से निपटने के लिए कार्यकर्ताओं को उचित प्रशिक्षण दिया जाए। जैव चिकित्सा कचरा (प्रबंधन और हैंडलिंग) 2015 के मसौदे में भी चिकित्सा कचरे से जुड़े जोखिम और खतरों के संकेत दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि जैव चिकित्सा कचरा न केवल अस्पतालों, बल्कि उनके लिए भी चुनौतियां हैं, जो इसको एकत्र करते हैं और उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजते हैं।
हाल के दिनों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्वास्थ्य निकायों ने मेडिकल कचरे की निगरानी को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। बेसेल संधि के माध्यम से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी रेडियोधर्मी कचरे के बाद दूसरे सबसे खतरनाक कचरे को अस्पतालों का कचरा बताया है।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि अस्पतालों के कचरे का निस्तारण सुरक्षित और मानक तरीके से किया जाना चाहिए। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण कमेटी के साथ जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन समिति को भी जोड़ा जाना चाहिए, ताकि वे मिलजुल कर काम कर सकें।
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