आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वे दुबई के एक सिंडिकेट से जुड़कर सट्टे का काम कर रहे हैं, पूरा काम कोडवर्ड में किया जाता है।
सटोरियों के मुताबिक, उनका यह धंधा आपसी भरोसे पर चलता है, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए सटोरिए आवाज तक रिकॉर्ड कर लेते हैं। पुलिस को इनके ठिकाने से दो वॉइस रिकॉर्डर भी मिले हैं।
सटोरियों ने पुलिस को बताया कि शहर छोड़ चुके कुछ सटोरियों ने अब दुबई के सिंडिकेट से जुड़कर पुणे, मुंबई और जबलपुर जैसे मेट्रो शहर में अपना कारोबार जमा लिया है, और जो सटोरिए राजधानी रायपुर में हैं, वे पुलिस से बचने के लिए बाहरी इलाके और आस-पास के छोटे कस्बों में चले गए हैं।
सटोरियों के अनुसार, पुलिस की छापेमारी से बचने के लिए अब सट्टे का सारा काम ऑनलाइन किया जाता है। फिर भी दांव लगाने के लिए एक नियत ठिकाना जरूरी होता है।
पुलिस को तहकीकात में पता चला है कि दो लाख रुपये से ज्यादा की कटिंग मुंबई और जबलपुर के बुकी से कराई जा रही है।
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