हरिद्वार, 23 जुलाई (आईएएनएस)। आध्यात्मिक क्षेत्र के नोबेल पुरस्कार माने जाने वाले टेंपल्टन पुरस्कार की निर्णायक समिति में पहली बार किसी भारतीय को जगह मिली है। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या को इस समिति के लिए नामित किया गया है।
डॉ. चिन्मय को इस आशय का एक पत्र टेंपल्टन फाउंडेशन के अध्यक्ष हिथर टेंपल्टन डिल ने भेजा है और अनुरोध किया है कि वह इस पद को संभालने के साथ इस क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं एवं लोगों का मार्गदर्शन करें।
शांतिकुंज की तरफ से जारी बयान के अनुसार, पत्र में कहा गया है कि 1972 में स्थापित यह फाउंडेशन प्रत्येक वर्ष विभिन्न देशों से चयनित व्यक्ति को यह पुरस्कार देता है, जिन्होंने व्यावहारिक कार्यो के माध्यम से, जीवन के आध्यात्मिक आयाम की पुष्टि करने के लिए असाधारण योगदान दिया हो।
उल्लेखनीय है कि भारत के तीन लोगों को अब तक यह पुरस्कार मिल चुका है, जिनमें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, भारतरत्न मदर टेरेसा एवं प्रख्यात दार्शनिक पांडुरंग शास्त्री आठवले शामिल हैं।
बयान के अनुसार, डॉ. पंड्या का कार्यकाल अक्टूबर 2017 से आगामी तीन वर्ष के लिए होगा। वह इस पद पर रहते हुए देश-विदेश में आध्यात्मिक व सामाजिक क्षेत्रों में कार्य कर रही जांच समिति द्वारा नामित व्यक्तियों में से किसी एक का चयन करेंगे।
निर्णायक समिति के लिए अपने चयन पर डॉ. पंड्या ने कहा, “यह सम्मान केवल मेरा ही नहीं है, वरन उन प्रत्येक भारतीयों के लिए है, जो इस क्षेत्र से जुड़े हैं।”
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