ट्राई का ब्रॉडकास्ट, केबल टैरिफ प्रस्ताव सही कदम : विश्लेषक

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा ब्रॉडकास्टिंग एंड केबल सर्विसेज टैरिफ के लिए प्रस्ताव सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन इससे संबंधित कुछ मुद्दों को स्पष्ट करने की जरूरत है। यह बात विश्लेषकों ने कही है।

ट्राई ने दूरसंचार (प्रसारण व केबल सेवाएं) (आठवां) (एड्रेसबल प्रणालियां) टैरिफ ऑर्डर, 2016 के मसौदे पर एक परामर्श पत्र जारी किया है। हितधारकों से मसौदे पर 24 अक्टूबर, 2016 तक लिखित टिप्पणी मांगी गई है।

मसौदे का मुख्य बिंदु यह है कि प्रत्येक प्रसारणकर्ता को यह घोषित करना होगा कि कौन सा चैनल ‘पेड’ है और कौन सा चैनल ‘फ्री’। प्रसारणकर्ता पे चैनल को ग्राहकों के लिए एक बकेट या अलग-अलग के आधार पर पेश कर सकते हैं। साथ ही उनकी कीमत को भी दर्शाना होगा।

मसौदे के मुताबिक, ग्राहक को 100 स्टैंडर्ड डेफिनिशन चैनल के लिए प्रति सेट टॉप बॉक्स के हिसाब से 130 रुपये मासिक देना होगा।

बैंक ऑफ अमेरिका के इन्वेस्टमेंट बैंकर मेरिल लिंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, “इस सिफारिश को हम सही दिशा में एक कदम करार दे सकते हैं, लेकिन अभी भी कुछ मुद्दे हैं, जिस पर विचार करने की जरूरत है।”

उन्होंने कहा कि श्रेणी को स्पष्ट रूप से पारिभाषित नहीं किया गया है। सामान्य तौर पर इंटरटेनमेंट चैनल, जनरल या प्रीमियम हो सकता है, लेकिन क्षेत्रीय या अंग्रेजी चैनलों के साथ ऐसा नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा, “चूंकि डिजिटाइजेशन का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है, इसलिए यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि प्रत्येक उपभोक्ता क्या सब्सक्राइब कर रहा है और कितना भुगतान कर रहा है। इस नई कीमत तथा उपलब्ध विकल्पों से उपभोक्ताओं को अवगत कराना आसान भी नहीं होगा और इसमें काफी समय भी लगेगा।”

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने कहा कि ट्राई द्वारा कीमतों पर नियंत्रण सही है।

उसने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि प्रसारणकर्ता अधिकांश पे चैनल पर मार्केट रिटेल प्राइस (एमआरपी) तय करेंगे। प्रसारणकर्ता के पास किसी चैनल को प्रीमियम घोषित करने और उसकी कीमत (एमआरपी) तय करने का विकल्प होगा, जो तय कीमत से अधिक हो सकता है।”

प्रस्तावित टैरिफ का मूल उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा करना है।

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