नई दिल्ली, 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। डायरेक्ट सेलिंग उद्योग का आकार 2019-20 तक 23,654.3 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। यह बात बुधवा को जारी एक रिपोर्ट में कही गई। रिपोर्ट के मुताबिक इस उद्योग की विकास दर 2014-15 में 6.5 फीसदी रही है, जो एक साल पहले 4.3 फीसदी थी। इस दौरान उद्योग की बिक्री 7,472.2 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,958.3 करोड़ रुपये हो गई।
इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (आईडीएसए) ने पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सहयोग से बुधवार को नई दिल्ली में भारतीय डायरेक्ट सेलिंग उद्योग पर वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2014-15 जारी की।
आईडीएसए के अध्यक्ष रजत बनर्जी ने बताया कि डायरेक्ट सेलिंग उद्योग की विकास दर 2014-15 में 6.5 फीसदी रही है, जो एक साल पहले 4.3 फीसदी थी। इस दौरान उद्योग की बिक्री 7,472.2 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,958.3 करोड़ रुपये हो गई।
लाखों लोगों के जीवन को सशक्त बनाने में डायरेक्ट सेलिंग उद्योग के योगदान पर बल देते हुए रजत बनर्जी ने कहा कि बीते वर्षो में डायरेक्ट सेलिंग उद्योग में लगातार वृद्धि हुई है और अर्थव्यवस्था में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। डायरेक्ट सेलिंग उद्योग की वृद्धि से साबित होता है कि यह वितरण मॉडल ग्राहकों के बीच लोकप्रिय होता जा रहा है।
आईडीएसए के कोषाध्यक्ष विवेक कटोच ने बताया कि नियामकीय ढांचे के अभाव में देश में कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई हैं, जिससे डायरेक्ट सेलरों की छवि खराब हुई है। इसलिए डायरेक्ट सेलिंग की संख्या 2013-14 के 43,83,287 की तुलना में 2014-15 में 39,29,105 रह गई। हम इसकी सफलता के प्रति बहुत आशान्वित हैं और उद्योग के विकास के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं।
वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी क्षेत्र का कुल बिक्री में योगदान लगभग 2,387.5 करोड़ रुपये है। समग्र बिक्री में इस क्षेत्र का योगदान 2013-14 के 29 फीसदी की तुलना में 2014-15 में 30 फीसदी रहा है। इस क्षेत्र ने 2013-14 के 12.2 फीसदी की तुलना में 2014-15 में 10 फीसदी की विकास दर दर्ज की है।
र्पिोट के अनुसार, हमारे देश के हितकर नीतिगत ढांचे के परिणामस्वरूप यह उद्योग 2019-20 तक 23,654.3 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
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