चेन्नई, 6 नवंबर (आईएएनएस)। तमिलनाडु में शनिवार को एक किसान की मौत के बाद वाणिज्यिक बैंकों द्वारा अपने कर्ज की वसूली के लिए रिकवकरी एजेंट को भेजने की चौतरफा आलोचना हो रही है।
यहां से करीब 195 किलोमीटर दूर तिरुवनमलाई जिले के किसान 55 वर्षीय गणसेकरन ने जिले के भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) द्वारा भेजे गए रिकवरी एजेंटों के उसके घर आने और जबरदस्ती ट्रैक्टर कब्जे में लेने के बाद आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने बैंक से ऋण लिया था।
किसान के परिवारवालों का कहना है कि रिकवरी एजेंटों ने उनके साथ बदसलूकी की थी। वहीं, बैंक अधिकारियों का कहना है कि वह उपस्थित नहीं थे और रिकवरी एजेंटों की उनके बेटे के साथ कहासुनी हुई थी।
पीएमके नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबुमणि रामदास ने कहा, “बैंकों की यह आदत बन चुकी है कि वे शिक्षा और टैक्टर ऋण लेनेवाले ऋणदाताओं को धमकाने के लिए गुंडे भेजते हैं। आरबीआई ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बैंकों को बकाया ऋण वसूलने के लिए कानूनी साधन अपनाने चाहिए।”
रामदास ने कहा कि बैंक गरीब किसानों को कर्ज नहीं लौटाने पर धमकाते हैं और अपमानित करते हैं। उन्होंने कहा कि बैंक विजय माल्या और बड़ी कंपनियों से हजारों करोड़ रुपये का कर्ज वसूलने में नाकाम हैं, जबकि आम ग्राहकों पर नए-नए शुल्क लगा रहे हैं।
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्श फेडरेशन के अध्यक्ष डी. थॉम फ्रैंकों राजेंद्र देव ने आईएएनएस को बताया कि वे “व्यक्तिगत ऋणों की वसूली के लिए रिकवर एजेंसी की सेवाएं लेने के खिलाफ हैं।”
देव ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्श कंफेडरशन के महासचिव भी हैं। उन्होंने कहा, “हालांकि बैंकों को सामाजिक लाभ के लिए बरसों पहले राष्ट्रीयकृत कर दिया गया था, लेकिन समय के साथ ऋण प्रक्रिया और आरबीआई के दिशानिर्देशों को कॉरपोरेट कंपनियों के पक्ष में मोड़ दिया गया है।”
देव ने बताया कि इस मामले में गणसेकरन पर एसबीआई का 5.2 लाख रुपये बकाया था।
उन्होंने कहा, “2017 के अक्टूबर के पहले हफ्ते में एसबीआई शाखा की एक महिला अधिकारी गणसेकरन से मिलने गई थी और बैंक द्वारा एक बार में निपटारा करने का ऑफर दिया था, लेकिन वे सहमत नहीं हुए।”
उनके मुताबिक, एक बार में निपटारा करने की योजना में बकाए का 50 फीसदी चुकाना होता है और ऋण खाता बंद कर दिया जाता है।
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