तमिलनाडु में चुनाव चिन्हों के प्रचार पर जोर

चेन्नई, 8 मई (आईएएनएस)। ‘यह आम का मौसम है’, पीएमके का टेलीविजन पर चुनाव प्रचार यह कहकर शुरू होता है। आम पीएमके का चुनाव निशान है। टीवी पर अन्य व्यावसायिक विज्ञापनों में आम के फटने से रस निकलता है, जबकि पीएमके के प्रचार में रस के अंदर से आम बाहर निकलता है।

चेन्नई, 8 मई (आईएएनएस)। ‘यह आम का मौसम है’, पीएमके का टेलीविजन पर चुनाव प्रचार यह कहकर शुरू होता है। आम पीएमके का चुनाव निशान है। टीवी पर अन्य व्यावसायिक विज्ञापनों में आम के फटने से रस निकलता है, जबकि पीएमके के प्रचार में रस के अंदर से आम बाहर निकलता है।

शायद तमिलनाडु में पीएमके अकेली पार्टी है जिसने 16 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपने चुनाव चिन्ह के प्रचार के लिए विभिन्न चैनलों पर प्रसारण समय खरीदा है।

चुनाव के दिन चुनाव चिन्हों की लड़ाई होती है। इसी से विजेता उभरता है। इसीलिए मतदाताओं का ध्यान खींचने के लिए राजनीतिक दल अपने चुनाव चिन्हों को लोगों के दिलोदिमाग में बसाना चाहते हैं।

यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रतिद्वंद्वी पार्टियां मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए उम्मीदवारों के एक जैसे नामों का सहारा लेती हैं।

चुनाव आयोग के एक अधिकारी के अनुसार प्रत्येक वोटिंग मशीन में राजनीतिक पार्टियों के चुनाव चिन्हों के लिए 15 बटन होंगे और एक बटन नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) के लिए होगा।

तमिलनाडु में 15 ज्ञात पार्टियां, अनेक छोटे संगठन और कई निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

इस बार सत्ताधारी एआईएडीएमके दो छोटी पार्टियों के साथ मिलकर 234 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। लेकिन, सभी उम्मीदवार एआईडीएमके के चुनाव चिन्ह, दो पत्तियां पर ही चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसा पार्टी के इतिहास में पहली बार हुआ है।

एक टैक्सी चालक ने आईएएनएस से जो कुछ कहा उससे चुनाव चिन्ह की ब्रांड जैसी हैसियत का अंदाज लगाया जा सकता है। उसने कहा, “मैं सत्ताधारी एआईएडीएमके की नीतियों से सहमत नहीं भी हो सकता हूं। लेकिन, जब वोट देने की बारी आती है तो मेरे लिए केवल दो पत्तियों वाला चुनाव चिन्ह सामने होता है।”

राज्य में दूसरे प्रमुख दल डीएमके का गठबंधन कांग्रेस, दो मुस्लिम पार्टियों और कुछ छोटे संगठनों के साथ है।

डीएमके का चुनाव निशान उगता हुआ सूरज और कांग्रेस का हाथ का पंजा है।

डीएमडीके (चुनाव चिन्ह-ढोलक) के नेतृत्व में तीसरे मोर्चे में माकपा (चुनाव चिन्ह-हथौड़ा, हंसिया और तारा), भाकपा (चुनाव चिन्ह-मक्का और हंसिया), वीसीके (चुनाव चिन्ह-अंगूठी), टीएमसी (नारियल का पेड़) और एमडीएमके (लट्ट) शामिल हैं।

उधर भाजपा (चुनाव चिन्ह-कमल) छोटे संगठनों के साथ मिलकर एक अन्य मोर्चे का नेतृत्व कर रही है।

नाम थामिझार काची पार्टी जलती हुई मोमबत्ती चुनाव चिन्ह के साथ 234 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

इसके अलावा कई निर्दलीय उम्मीदवार हैं जो विभिन्न चुनाव चिन्हों पर चुनाव लड़ रहे हैं।

हालांकि, एआईएडीएमके और डीएमके के चुनाव चिन्ह काफी जाने पहचाने हैं, लेकिन दोनों पार्टियां कोई चूक नहीं चाहती हैं। अपने सभी विज्ञापनों में दोनों पार्टियां अपने-अपने चुनाव चिन्ह पर काफी जोर दे रही हैं ताकि मतदाता उन्हें नहीं भूलें।

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