इस संदर्भ में 54 देशों में ताइवान एक पायदान नीचे खिसक कर 15वें स्थान पर आ गया है, जबकि पिछले साल यह 14वें स्थान पर था। ताइपे के आयातक एवं निर्यातक संघ ने गुरुवार मुख्य एवं उभरते हुए बाजारों में वैश्विक व्यापार पर आधारित रपट जारी की।
रपट के मुताबिक, ताइवान की रैकिंग में गिरावट क्रॉस-स्ट्रेट सेवा समझौते का असफल होना, बिगड़ता कारोबारी माहौल, निवेशकों की संख्या में कमी और प्रतिभा में कमी मुख्य कारण हैं। इस सर्वेक्षण में प्रतिस्पर्धा, व्यापार सुविधा, व्यापार जोखिम और सर्वेक्षित देशों के भावी रुझानों सहित विभिन्न संकेतक शामिल हैं।
रपट के मुताबिक, ताइवान की कंपनियों को चीन की बेल्ट एडं रोड परियोजना सहित विभिन्न परियोजनाओं से लाभ उठाना चाहिए। चीन की इस परियोजना का उद्देश्य प्राचीन रेशम मार्ग को बहाल करना है।
इस सूची में सिंगापुर प्रथम स्थान पर है, जिसके बाद अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, हांगकांग, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड, कनाडा, जापान और आस्ट्रेलिया का स्थान है।
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