नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। तिहाड़ केंद्रीय कारागार में रह रहे कैदियों की कलात्मक प्रतिभा को बाहर लाने और पुनर्वास में उनकी सहायता करने के लिए जेल कारागार के परिसर में कला की कार्यशाला का आयोजन किया गया। गुरुवार को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी गई।
बुधवार को हुई कला की कार्यशाला में कैदियों को प्रशिक्षण देने के लिए दिल्ली के एक प्रमुख कला निदेशक रत्न रुद्र को बुलाया गया था।
तिहाड़ जेल के महानिदेशक आलोक कुमार ने घोषणा की कि किशोरों के लिए इस तरह के प्रशिक्षण सत्र का आयोजन हर पखवाड़े में किया जाएगा, क्योंकि किशारों का पुनर्वास सबसे बड़ी चिंता का विषय है।
वर्मा ने कहा, “कैदियों के एक समूह का ग्राफिक डिजाइनिंग के लिए चयन किया जाएगा, ताकि जब ये कैदी मुख्य धारा में वापस लौटें तो वे नौकरी अथवा स्वरोजगार के लिए योग्य हो सकें। इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में बसने के लिए उन्हें एक रास्ता उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सकारात्मकता लाना है।”
उन्होंने कहा, “कला की कार्यशाला से कैदियों के भीतर छिपी प्रतिभा भी सामने आएगी और जेल के अधिकारियों को उनकी सोच की परख जानने में सहायता होगी।”
इस कार्यशाला का आयोजन तिहार जेल प्रशासन और लीजेंड्स ऑफ इंडिया के सहयोग से किया गया। लीजेंड्स ऑफ इंडिया एक पंजीकृत सोसाइटी है जो प्रसिद्ध कलाकारों के कार्यक्रमों का आयोजन कराती है।
लीजेंड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष दीपायन मजूमदार ने कहा कि कैदियों में कला की बेहतरीन समझ है।
मजूमदार ने कहा, “उनकी कुछ कलाकृतियां इतनी उत्साहवर्धक थीं कि हम उनकी कला को दुनिया को दिखाने के लिए इस साल के अंत तक एक प्रदर्शनी लगाने पर विचार कर रहे हैं।”
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