फातिह ने कहा कि मांग कम है, क्योंकि प्रमुख देशों में आर्थिक विकास दर घट रही है।
उन्होंने कहा, “2016 में हम तेल मूल्यों पर गिरावट का दबाव देखेंगे, लेकिन 2017 में कीमतों में वृद्धि शुरू होने का अनुमान है।”
उन्होंने अगले चार से पांच साल में तेल मूल्य बढ़कर प्रति बैरल 80 डॉलर होने का अनुमान जताया।
उन्होंने कहा कि तेल मूल्य कम होना हालांकि तेल आयात करने वाले कुछ देशों के लिए शुभ है। तेल निर्यातक देशों के लिए हालांकि यह अशुभ है, जिनमें खास तौर से मध्य पूर्व के देश और रूस आते हैं।
46वां विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) सालाना बैठक स्विट्जरलैंड के दावोस-क्लोस्टर्स में 20-23 जनवरी को हुआ। इसका थीम था ‘मास्टरिंग द फोर्थ इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन’।
फातिह ने कहा कि आने वाले समय में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि अधिकतर नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना विकासशील देशों में हुई है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए भविष्य में करीब 40 फीसदी ऊर्जा आपूर्ति शून्य उत्सर्जन प्रौद्योगिकी से होनी जरूरी है।
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