वाशिंगटन, 28 मार्च (आईएएनएस)। सऊदी अरब कच्चे तेल के निर्यातक देश की अपनी भूमिका से आगे बढ़ कर स्वयं को परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों के आपूर्तिकर्ता देश के रूप में ढालने की दिशा में प्रयासरत है। इस वजह से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और तेल बाजारों में संतुलन पर सऊदी अरब का प्रभाव कम होगा। यह बात एक नए अध्ययन में सामने आई है।
यह अध्ययन ‘एनर्जी पॉलिसी’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है, जिसमें सऊदी में तेल शोधन में वृद्धि, देश में कच्चे तेल की बढ़ती घरेलू मांग और इस विकास के भूराजनीतिक प्रभावों की जांच की गई।
अमेरिका के राइस विश्वविद्यालय में सार्वजनिक नीति के बेकर संस्थान में कार्यरत शोधकर्ता जिम क्रेन ने कहा, “यही वह कदम है, जिसे हम अधिक प्रगति करने की दिशा में उठाना चाहते हैं।”
क्रेन ने कहा कि परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों में निवेश करने के कई अच्छे पहलू हैं, जिसमें ईंधन आयात पर देश की निर्भरता कम होना शामिल है।
उन्होंने कहा, “रिफाइनिंग से एक लाभ यह है कि इससे कुछ चुनिंदा आयातकों के बजाए देश व्यापक स्तर पर ग्राहकों को कच्चा तेल निर्यात कर सकता है।”
हालांकि इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं। मसलन, वैश्विक स्तर पर सऊदी अरब कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा देश है। परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों पर जोर देने से वह सऊदी अरब कच्चे तेल के क्षेत्र में अपनी व्यापक परंपरागत भूमिका से बाहर निकल सकता है।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि तेल उत्पादन पर ध्यान देने के बजाए परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करने से सऊदी अरब का कच्चे तेल की अस्थिरता पर नियंत्रण घट सकता है।
dharmpath.com dharmpath