त्रिपुरा : नागरिकता विधेयक के खिलाफ एकजुट हुईं जनजातीय पार्टियां

अगरतला, 6 मार्च (आईएएनएस)। वामदल शासित त्रिपुरा में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन राज्य में जनजातीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले दो प्रमुख राजनीतिक दलों ने अभी से केंद्र सरकार के प्रस्तावित ‘नागरिकता विधेयक’ का विरोध शुरू कर दिया है।

अगरतला, 6 मार्च (आईएएनएस)। वामदल शासित त्रिपुरा में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन राज्य में जनजातीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले दो प्रमुख राजनीतिक दलों ने अभी से केंद्र सरकार के प्रस्तावित ‘नागरिकता विधेयक’ का विरोध शुरू कर दिया है।

इंडीजीनस नेशनलिस्ट पार्टी ऑफ त्रिपुरा (आईएनपीटी) और इंडीजीनस पीपुल्स फ्रंच ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) ने केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ अलग-अलग नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन भी किए।

त्रिपुरा की राजनीति में जनजातीय समुदाय की भूमिका काफी अहम मानी जाती है, क्योंकि त्रिपुरा की 60 विधानसभा सीटों की एक तिहाई सीटें अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित होती हैं। इसके अलावा लोकसभा की दो सीटों में से भी एक सीट अरक्षित सीट है।

केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए नागरिकता विधेयक के खिलाफ अपनी आवाज एकजुट करने के उद्देश्य से आईपीएफटी और आईएनपीटी ने एक अन्य जनजातीय पार्टी नेशनल कान्फ्रेंस ऑफ त्रिपुरा (एनसीटी) के साथ जनवरी के मध्य एक संगठन ‘ऑल त्रिपुरा इंडीजीनस रीजनल पार्टीज फोरम’ (एटीआईआरपीएफ) का गठन किया।

एटीआईआरपीएफ ने आठ फरवरी को अपनी मांगों के समर्थन में त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषदों (टीटीएएडीसी) में हड़ताल की थी।

उल्लेखनीय है कि जनजातीय समुदाय के राजनीतिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक हितों की रक्षा के लिए 1987 में सांविधानिक रूप से टीटीएएडीसी की स्थापना की गई।

आईपीएफटी अलग से विरोध प्रदर्शन करते हुए टीटीएएडीसी के क्षेत्र में विस्तार करते हुए पृथक राज्य गठित करने की मांग भी करता रहा है।

आईपीएफटी के अध्यक्ष नरेंद्र चंद्र देबबर्मा ने सोमवार को आईएएनएस से कहा, “दिल्ली में 1-3 मार्च के बीच विरोध प्रदर्शन के दौरान आईपीएफटी का एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जीतेंद्र सिंह से दो मार्च को मुलाकात भी की और नागरिकता विधेयक तथा पृथक राज्य के गठन पर चर्चा की। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि वह संबंधित मंत्रियों से इन मुद्दों पर चर्चा करेंगे।”

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जीतेंद्र सिंह ने आईपीएफटी के नेताओं के साथ अपने मंत्रालय में मुलाकात की और टीटीएएडीसी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

देबबर्मा ने कहा, “अब हम अपनी मांगों के समर्थन में त्रिपुरा में विरोध प्रदर्शन करेंगे।”

वहीं आईएनपीटी के प्रवक्ता स्रोता रंजन खीसा ने आईएएनएस से कहा, “आईएनपीटी की केंद्रीय कार्यकारी समिति हमारी मांगों के समर्थन में अगले विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम तय करने के लिए 17 मार्च को यहां बैठक करेगी।”

उन्होंने बताया, “केंद्रीय गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने दिल्ली में आईएनपीटी के प्रतिनिधिमंडल को बताया था कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में स्थित स्वायत्त जिला परिषदों की स्वायत्तता बढ़ाने पर काम कर रही है।”

पूर्वोत्तर में जनजातीय समुदाय यहां की कुल आबादी का 27 से 28 फीसदी है और जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कुल 10 स्वायत्त जिला परिषदों का गठन किया गया है।

संवैधानिक प्रावधान के तहत गठित इन 10 स्वायत्त जिला परिषदों में से असम, मेघालय और मिजोरम में तीन-तीन और त्रिपुरा में एक स्वायत्त जिला परिषद है।

मणिपुर में राज्य सरकार ने प्रशासनिक फैसले के तहत छह स्वायत्त जिला परिषदों का गठन किया है।

गौरतलब है कि देश के प्रमुख राजनीतिक दलों कांग्रेस, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की त्रिपुरा में उपस्थिति नगण्य है और अगले विधानसभा चुनाव में ये दल स्थानीय दलों के साथ मिलकर राज्य में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाना चाहते हैं।

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