अगरतला, 22 जून (आईएएनएस)। पृथक राज्य की मांग को लेकर एक जनजातीय संगठन ने त्रिपुरा में बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-8 और रेल पटरी पर जाम कर दिया। ये दोनों यातायात मार्गो से पूर्वोत्तर का यह राज्य बाहरी दुनिया से जुड़ता है।
पृथक राज्य के गठन की मांग को लेकर त्रिपुरा स्वदेशी लोक मंच (आईपीएफटी) विगत कुछ वर्षो से आन्दोलनरत है। संगठन ने बुधवार को पश्चिमी त्रिपुरा के बारामुरा पहाड़ी क्षेत्र में स्थित खामितिंग में सुबह छह बजे से 24 घंटे का रेल और सड़क जाम शुरू किया।
जनजातीय प्रदर्शनकारी अपने नेताओं के नेतृत्व में राजमार्ग और राज्य के इकलौते रेल मार्ग पर बैठ गए।
आन्दोलन स्थल पर डेरा जमाए पश्चिमी त्रिपुरा जिले के पुलिस प्रमुख अभिजीत सप्तर्षि ने आईएएनएस से कहा, “करीब 10 हजार आन्दोलनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल मार्ग को जाम कर दिया और वे रुक-रुक कर नारेबाजी कर रहे हैं।”
उन्होंने हालांकि कहा कि कोई अप्रिय घटना नहीं घटी है।
पुलिस महानिरीक्षक(कानून-व्यवस्था) अनुराग ने आईएएनएस से कहा, “रेल और सड़क जाम स्थल के आसपास हमने सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए हैं। क्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में त्रिपुरा राज्य राइफल्स और केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों के जवान तैनात किए गए हैं।”
आईपीएफटी त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) को क्रमोन्नत कर एक पृथक राज्य का गठन चाहता है।
साल 1985 में संविधान की छठी अनुसूची में संशोधन कर टीटीएएडीसी का गठन किया गया था, जिस पर माकपा नीत सत्ताधारी वाम मोर्चा का कब्जा है।
आईपीएफटी के अध्यक्ष नरेंद्र चंद्र देबबर्मा ने टीटीएएडीसी को शक्तिहीन बनाने के लिए राज्य की वाम मोर्चा सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
देबबर्मा ने संवाददाताओं से कहा, “जनजातीय क्षेत्रों में बहुत कम विकास हुए हैं। जनजातियों की मूल समस्याएं दूर नहीं हुई हैं। जनजातीय लोग लगातार अपनी जमीन खो रहे हैं। यहां तक कि जनजातियों की ‘कोरबोरोक’ भाषा का भी बुरा हाल है।”
आईएफटी के अध्यक्ष ने कहा, “हमने केंद्रीय गृह मंत्रालय को कई बार ज्ञापन दिया है। मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि हमारी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा। केंद्र सरकार और आईएफटी के नेताओं के साथ बातचीत जारी है।”
सत्ताधारी वाम मोर्चा, विपक्षी कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और अन्य राजनीतिक पार्टियों ने आईएफटी की पृथक राज्य के गठन की मांग का पुरजोर विरोध किया है।
इन पार्टियों ने कहा कि पृथक राज्य की मांग प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को राज्य में फिर से पैर जमाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य गौतम दास ने आईएएनएस से कहा कि त्रिपुरा जैसे छोटे राज्य का विभाजन नहीं हो सकता है।
राज्य के मुख्यमंत्री माणिक सरकार भी कई अवसरों पर पृथक राज्य की मांग खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वाम मोर्चा सरकार राज्य के विभाजन के किसी प्रयास को सफल नहीं होने देगी।
सरकार ने यह भी कहा कि वह ऐसे प्रयास का पूरी ताकत से विरोध करेंगे।
उल्लेखनीय है कि त्रिपुरा के दो-तिहाई भू-भाग टीटीएएडीसी के अधिकार क्षेत्र में हैं और यह जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभा रही है।
स्वायत्तशासी क्षेत्र में करीब 12.16 लाख लोग रहते हैं, जिनमें 90 प्रतिशत जनजातीय हैं। राज्य में जनजातियों की कुल आबादी करीब 37 लाख है, जो कुल अबादी का एक-तिहाई है।
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