धर्मशाला, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। रवांडा में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) शिखर वार्ता से बमुश्किल कुछ दिन पहले तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने मंगलवार को कार्बन उत्सर्जन के कारण ग्लोबल वॉर्मिग के बढ़ने से होने वाले नुकसानों पर चिंता जताई। शिखर वार्ता में 190 देश तेजी से क्षीण होती ओजोन परत को बचाने के उपायों पर चर्चा करेंगे।
दलाई लामा एक सक्रिय पर्यावरणविद भी हैं। उन्होंने चिंता जताने के साथ ही विश्वास जताते हुए कहा, “अगर हम सचमुच प्रयास करेंगे, तो बदलाव हो सकता है।”
ताइवान के एक समूह को जीवन के सुखों के बारे में प्रवचन देने के दौरान बौद्ध धर्मगुरु ने ओजोन परत को क्षति पहुंचने और उसे सुधारने के लिए प्रभावशाली कदमों का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा, “अगर हम कार्बन उत्सर्जन कम करने का प्रयास करें, जीवाश्म ईंधन के प्रयोग में कटौती करें, उसकी जगह सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का प्रयोग करें तो यह पहले हो चुकी क्षति की भरपाई करेगा।”
रवांडा की राजधानी किगाली में 10 से 14 अक्टूबर के बीच होने जा रहे यूएनईपी के शिखर सम्मेलन के एजेंडे में सबसे ऊपर रेफ्रीजरेशन और एयरकंडीशनिंग में इस्तेमाल होने वाले हाईड्रोफ्लूरोकार्बन्स (एचएफसी) को खत्म करने में बड़ा सुधार करना है, जिससे वैश्विक तापमान को 0.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी।
अध्ययनों के मुताबिक, एचएफसी में कार्बन डायऑक्साइड की तुलना में वातावरण में गर्मी को बनाए रखने की 10,000 गुणा अधिक क्षमता होती है।
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