दलितों को सम्मान दिलाने के लिए बाबा साहब ने अपमान तक सहा : मोदी (राउंडअप)

इंदौर, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्यप्रदेश के महू में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जन्मस्थली से ‘ग्रामोदय से भारत उदय अभियान’ की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने वंचित, दलितों व शोषितों को हक तथा सम्मान दिलाने के लिए अपमान तक सहा।

प्रधानमंत्री मोदी ने महू स्थित अंबेडकर स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद सैनिक मैदान में आयोजित सभा में कहा कि बाबा साहब अपने मान-सम्मान के लिए नहीं, बल्कि समाज की बुराइयों के खिलाफ जंग छेड़ने वाले नायक थे। समाज के आखिरी छोर पर बैठे दलित, शोषित को बराबरी का हक और सम्मान दिलाने के इसके लिए उन्हें अपमानित भी होना पड़ा, मगर वे अपने मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए।

डॉ. अंबेडकर की शिक्षा और योग्यता का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिस महापुरुष के पास इतनी बड़ी ज्ञान संपदा हो, विश्व की गणमान्य विश्वविद्यालय की डिग्री हो, उसने अपने लिए कुछ नहीं लिया। उस कालखंड में अपने लिए लेने-पाने के अवसर भरे पड़े, मगर उन्होंने गरीबों, शोषितों के हक के लिए सारे अवसरों को छोड़कर अपने को इस देश की मिट्टी में खपा दिया।

मोदी ने कहा कि भारत रत्न बाबा साहेब द्वारा देश को सुदृढ़ बनाने के लिए संविधान में की गई अपेक्षाओं और महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज को साकार करने का काम अधूरा है। इसे पूरा करने के लिए विकास के सभी स्रोतों और संसाधनों को गांव की ओर मोड़ने की जरूरत है, क्योंकि विकास के लिए टुकड़ों में काम करने से बात नहीं बनेगी।

उन्होंने कांग्रेस का नाम लिए बिना बड़ा हमला बोला और कहा कि बीते छह दशक से अपने को गरीबों का मसीहा प्रस्तुत करने वालों का हिसाब चौंकाने वाला है।

उन्होंने कहा किकुछ लोग बीते छह दशकों से अपने को गरीबों का मसीहा प्रस्तुत करते आ रहे हैं, उनकी जुबां पर हर समय गरीब ही गरीब होता है। जब उनका हिसाब देखा जाए तो वह चौंका देता है।

प्रधानमंत्री ने बीते छह दशकों के शासन पर कटाक्ष किया और कहा कि गरीबों की बात करने वालों के काल में लगभग 18 हजार गांव ऐसे थे, जहां न तो बिजली का खंभा लगा था और न ही तार बिछे थे। उन्होंने आगामी एक हजार दिनों में इन सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसी तरह झुग्गी और कच्चे मकानों में रहने वालों को गैस कनेक्शन देने की मुहिम चलाई है।

उन्होंने बताया कि बीते दिनों 90 लाख परिवारों ने गैस पर से सब्सिडी लेना बंद कर दिया है, वहीं एक करोड़ परिवारों को नए कनेक्शन दिए गए हैं। आगामी वर्षो में पांच करोड़ परिवारों को नए कनेक्शन देने की योजना है।

उन्होंने आगे कहा कि बहुत कम लोगों केा अंबेडकर साहब को पूरी तरह समझने का मौका मिला है, ज्यादातर लोगों को लगता है कि डॉ. अंबेडकर दलितों के देवता हैं, मगर बहुत कम लोग जानते हैं कि डॉ. अंबेडकर दिव्यद्रष्टा थे। उनके पास भारत कैसा बने इसकी दृष्टि थी।

प्रधानमंत्री ने पंचतीर्थ का जिक्र करते हुए कहा, “कुछ लोग इसलिए परेशान है कि मोदी ऐसा क्यों कर रहे हैं, यह हमारी श्रद्धा का विषय है, हम मानते हैं कि बाबा साहब ने सामाजिक एकता के लिए उच्च मूल्यों का प्रस्थापन किया। सामाजिक एकता, सामाजिक न्याय, सामाजिक समरसता के लिए उन्होंने जो रास्ता दिखाया है, उसी पर चलकर प्राप्त किया जा सकता है, इसीलिए हम उनके चरणों में बैठ करके काम करने में गर्व अनुभव करते हैं।”

उन्होंने कहा, “देश की आजादी के बाद सरकारें बहुत आईं, डॉ. अंबेडकर के निधन के साठ साल बाद उनका स्मारक बनाने का सौभाग्य हमें मिला, उन्हें स्मारक बनाने से किसी ने रोका था क्या। आज हम कर रहे हैं तो आपको परेशानी हो रही है, आपको तो पश्चताप होना चाहिए कि हमने किया क्यों नहीं, परेशान होने की जरुरत नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि डॉ. अंबेडकर एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संकल्प का दूसरा नाम थे। बाबा साहब जीवन जीते नहीं थे, वे जीवन को संघर्ष में जोड़ और जोत देते थे।

उन्होंने कहा कि देश की अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत करना जरुरी है। सिर्फ पांच-पचास शहरों और पांच-पचास उद्योगों से देश की अर्थ व्यवस्था को मजबूती नहीं दी जा सकती है।

इस सभा को केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने संबोधित किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री को एक ध्वज सौंपा जो गांव-गांव तक अभियान का संदेश लेकर जाएगा।

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने अंबेडकर स्मारक स्थल पर पहुंचकर डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प की माला अर्पित कर याद किया। उसके बाद वह उस कमरे में भी गए, जहां एक पालना रखा हुआ है। परंपरा के मुताबिक, मोदी ने इस पालना को हिलाया। इसके अलावा डॉ. अंबेडकर के जीवन पर आधारित चित्रों को भी उन्होंने देखा।

प्रधानमंत्री मोदी अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक मुंबई से वायुसेना के विशेष विमान से इंदौर पहुंचे। इंदौर हवाईअड्डे पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अन्य अधिकारियों के साथ उनकी अगवानी की। उसके बाद प्रधानमंत्री हेलीकॉप्टर से महू पहुंचे। कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद प्रधानमंत्री महू से हेलीकॉप्टर से इंदौर और इंदौर से वायुसेना के विमान से दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गए।

डॉ. अंबेडकर की 125वीं जयंती के मौके पर उनकी जन्मस्थली महू में बने स्मारक पर गुरुवार की सुबह से ही बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, यहां पहुंचे रहे लोग डॉ. अंबेडकर को श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें याद कर रहे हैं।

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