दिग्विजय सिंह ने संसद में उठाई बासमती चावल को GI टैग देने की मांग

नई दिल्ली- मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने प्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को जी.आई. टैग (Geographical Indication) न दिए जाने को लेकर चिंता जताई है। सिंह ने केंद्र सरकार पर मध्य प्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया और कहा कि GI टैग के अभाव में प्रदेश के किसान अपने ही उगाए बासमती चावल का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कांग्रेस नेता ने केंद्र से मांग की है कि राज्य की बासमती चावल को GI टैग दिया जाए।

गुरुवार को राज्यसभा को संबोधित करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि मध्य प्रदेश में हर साल करीब 4 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा बासमती चावल का उत्पादन होता है। यहां का बासमती चावल अन्य राज्यों से बेहतर किस्म का है। लेकिन GI टैग न मिलने के कारण, पंजाब और अन्य राज्यों के व्यापारी मप्र के बासमती चावल में अपने राज्यों का GI टैग लगाकर निर्यात करने का लाभ कमा रहे हैं। इससे मप्र के किसान अपने हक से वंचित हो रहे हैं और उन्हें खुद के उगाए चावल का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सिंह ने संसद में बताया कि उन्होंने साल 2013 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार से मुलाकात कर मध्य प्रदेश के बासमती चावल का GI टैग स्वीकृत करवा दिया था, लेकिन मोदी सरकार आते ही साल 2016 में उसे निरस्त कर दिया गया। सिंह ने कहा कि ये हमारा दुर्भाग्य है कि आज देश के कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, लेकिन फिर भी प्रदेश को GI टैग नहीं दिया गया है। यदि मध्य प्रदेश को GI टैग मिल जाता है तो राज्य से 40 फीसदी बासमती चावल का निर्यात किया जा सकता है।

About Dharm Path


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493