मनोज पाठक
मनोज पाठक
मुजफ्फरपुर, 14 फरवरी (आईएएनएस)। एक ओर जहां आमलोग अब खेतीबारी (कृषि) से दूर हो रहे हैं, वहीं मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड के मछही गांव निवासी दिनेश कुमार न केवल खेती को ही अपने जीवन का लक्ष्य बनाया, बल्कि दो लाख लोगों को जैविक खेती से जोड़कर उन्हें कृषि से ही रोजगार दिलाने का संकल्प भी लिया है।
दिनेश का दावा है कि राज्य में 90 हजार से ज्यादा किसानों को वे प्रशिक्षण दे चुके हैं जो अब कृषि के सहारे ही अपनी जीविका चला रहे हैं। दिनेश थाईलैंड जाकर बजाप्ता खेती के लिए उपयोग में लाए जाने वाली नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त की है, बल्कि अब उसी गुर से यहां के किसानों को रोजगार भी उपलब्ध करवा रहे हैं।
ऐसा नहीं कि दिनेश बचपन से ही कृषि को अपना लक्ष्य बनाया था। युवा अवस्था में बिहार के लोगों को घर छोड़ रोजगार के लिए पलायन करते देखना दिनेश को अंदर तक झकझोर दिया और उन्होंने उन क्षेत्रों में जाकर ही खेती के गुर सिखने को ठान ली।
दिनेश 15 वर्ष की आयु में गांव के अन्य मजदूरों के साथ 1993 में हरियाणा चले गए और वहां मजदूरी करते हुए खेती के गुर सिखने लगे। हरियाणा के हिसार जिले के शेखोपुर सोत्तर में खेतों में मजदूरी करने लगे। इसके बाद उन्होंने एक कृषक से पांच एकड़ जमीन लीज पर ली और उसमें गन्ने की ऐसी उन्नत खेती की कि पहले ही प्रयास में हरियाणा के सर्वश्रेष्ठ गन्ना उत्पादक बन गए।
तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने इन्हें सर्वश्रेष्ठ किसान का पुरस्कार दिया।
इसके बाद दिनेश फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने कृषि यांत्रीकरण के लिए पुरस्त किया। उसी साल जैविक खेती के प्रशिक्षण के लिए थाईलैंड और 2004 में कृषि यांत्रीकरण के प्रशिक्षण के लिए सरकार की ओर से जापान भेजा गया।
जापान से लौटने के बाद दिनेश ने अपने राज्य का रुख किया और यहां के किसानों को बेहतर जैविक खेती से किसानों को अधिक आमदनी व रोजगार दिलाने की ओर कदम बढ़ाया।
दिनेश बताते हैं कि अब तक करीब 90 हजार किसान उनसे जैविक खेती के तरीके सीख कर जीविका चला रहे हैं। दिनेश किसानों को जैविक खेती के लिए स्वयं प्रशिक्षण देते हैं और बीज व फसलों में बीमारी लगने पर मुफ्त उपचार के लिए विशेषज्ञों के सुझाव उपलब्ध कराते हैं।
बकौल दिनेश, “मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, मोतिहारी, बेगूसराय, कटिहार, समस्तीपुर और दरभंगा जिले के करीब 90 हजार किसान अब तक इनसे जुड़ चुके हैं।”
दिनेश कहते हैं, “मेरा लक्ष्य दो लाख किसानों को जैविक खेती से जोड़कर उन्हें कृषि से ही रोजगार दिलाना है। इसके लिए लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाता है।”
दिनेश ने मुजफ्फरपुर के सकरा प्रखंड के मछही-सकरा सब्जी उत्पादक कृषक हितकारी समूह बनाया। वर्तमान में 155 किसानों का समूह इससे जुड़ा है। दिनेश किसानों को उन्नत बीज व तकनीकी जानकारी देकर गन्ना, गेहूं, धान के साथ भिंडी, कद्दू, नेनुआ, करेला, फूलगोभी, बैगन, आलू, अदरख, धनिया पत्ता, तुलसी पत्ता व बेबी कर्न का उत्पादन कराते हैं।
फसल तैयार होने के बाद स्थानीय बाजार से अधिक कीमत देकर खासकर सब्जियों को नेपाल, पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश तक भेजने की व्यवस्था भी कराते हैं।
दिनेश कहते हैं, “रासायनिक खाद से मिट्टी के साथ ही लोगों की सेहत भी खराब हो रही है। किसानों को रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ ही मिट्टी व लोगों का स्वास्थ्य बचाने की भी जानकारी दी जाती है।”
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