नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी के पुराने नाट्य समूहों के दस्तावेजीकरण के उद्देश्य से दिल्ली के चार नाट्य संस्थाओं के कार्यो और उनके कार्यो के संग्रहण की प्रक्रिया पर चर्चा के लिए दो दिवसीय आयोजन ‘रंग स्मरण’ में मंगलवार को ‘दिल्ली आर्ट थियेटर’ और ‘यात्रिक’ के कार्यो पर चर्चा की गई।
दिल्ली में 1950 और 1960 के दशक के पंजाबी ओपेरा शैली के नाटकों की लोकप्रियता दिल्ली आर्ट थिएटर के निर्माण के साथ काफी बढ़ गई, लेकिन 2008 में इसकी संस्थापक तथा दिग्गज रंगकर्मी शीला भाटिया के निधन के साथ यह समूह निष्क्रिय हो गया।
भारतीय रंगकर्म के आर्काइव तथा संसाधन केन्द्र – नटरंग प्रतिष्ठान अपनी अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना के साथ सामने आया है। इसने दिल्ली आर्ट थिएटर के साथ-साथ राजधानी के महत्वपूर्ण नाट्य समूहों के योगदान को सामने लाने तथा उनसे जुड़ी स्मृतियों को जीवंत बनाने का बीड़ा उठाया है।
संग्रहण की प्रक्रिया को रजा फाउंडेशन की ओर से सहायता प्रदान की जा रही है, जिसकी स्थापना आधुनिक कला चित्रकार एस. एच. रजा ने की थी। रजा की गत वर्ष मृत्यु हो गई थी।
यहां साहित्य अकादमी में मंगलवार (28 मार्च को) को आरंभ हुए इस आयोजन में दिल्ली आर्ट थिएटर के सदस्यों ने अपनी पुरानी यादों को साझा किया और कहा कि कैसे वे इस प्रतिष्ठित थिएटर के निर्माण के साथ जुड़े।
रंग निर्देशक कीर्ति जैन ने कहा, “इस पहल के पीछे की अवधारणा यह है कि दिल्ली के पुराने नाट्य समूहों का दस्तावेजीकरण किया जाए तथा उनकी समृद्धि के लिए मौखिक इतिहास को रिकार्ड किया जाए। स्वतंत्रता के बाद की अवधि वास्तव में बहुत ही रोमांचकारी थी, जिस दौरान अनेक नाटक समूहों का उदय हुआ, लेकिन दुर्भाग्य से उनका कोई भौतिक रिकार्ड नहीं है। हमारा उद्देश्य युवा पीढ़ी के लिए उन क्षणों और स्मृतियों को सहेजना है।”
कीर्ति जैन ‘नटरंग’ की शुरुआत करने वाले दिवंगत कवि एवं रंगकर्मी नेमिचंद जैन की पुत्री हैं। नटरंग देश की सबसे पुरानी थिएटर पत्रिका है, जो अभी भी प्रकाशित हो रही है। इस पत्रिका के पूर्व के संस्करणों तथा नेमिचंद जैन के निजी संग्रहों में से ब्रोशरों, पोस्टरों, पुस्तकों एवं मीडिया क्लिपिंग्स को डिजिटल तरीके से संग्रहित किया जा चुका है।
यह संस्था अपनी ‘रंग संवाद श्रृंखला’ के जरिए देश के थिएटर समूहों एवं थिएटर हस्तियों के कार्यों को संग्रहित करने में जुटी है। रंग संवाद के तहत कुछ समय से थिएटर हस्तियों के साथ संवाद का आयोजन किया जा रहा है।
आयोजन के दौरान एक लघु वीडियो क्लिप को भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें शीला भाटिया को इस थिएटर ग्रुप की शुरुआत के बारे में बताते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो में उन्होंने कई यादों को साझा किया।
इसके अलावा आयोजन में एक और थिएटर समूह यात्रिक के सदस्यों ने भी अपनी पुरानी स्मृतियों को ताजा किया। यात्रिक की अगुआई जॉय माइकल करते हैं, जिन्हें भारतीय थिएटर का अगुआ माना जाता है। यह समूह पिछले 50 वर्षो से सक्रिय है।
सुषमा सेठ, भास्कर घोष, सुनीत टंडन और अविजित दत्त ने 1964 में स्थापित रीपर्टरी से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया। ये रीपर्टरी दिल्ली में थियेटर, म्यूजिक और नृत्य के द्विभाशी प्रदर्शनों का आयोजन करती है।
साहित्य अकादमी में, फोटो, ब्रोशर और प्लेलिस्ट की छोटी प्रदर्शनी आयोजित की गई जो इन समूहों की यात्रा की झलक प्रदान करती है।
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